कुछ साल पहले केन्द्र सरकार ने दिशार्निदेश जारी किए थे कि किसी हादसे की जगह पर अस्पताल पहुंचाने वालों को पुलिस परेशान नहीं करेगी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सहमति जताते हुए उस पर मुहर लगाई थी। लेकिन अब यह ट्रेंड सामने आ रहा है कि हादसे पर मौजूद लोग दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद करने की बजाय वीडियो और सेल्फी लेने लगते हैं।
नोएडा ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इस ट्रेंड से न केवल ट्रैफिक जाम लग जाता है, साथ ही एंबुलेंस और पुलिस बल को हादसे के स्थल पर पहुंचनें में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नोएडा पुलिस का कहना है कि जनवरी 2019 से लेकर मई 2019 तक 481 हादसे हुए जिनमें 220 लोगों की जानें गईं और तकरीबन 393 लोग जख्मी हुए।
नोएडा ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद करना सभी नागरिकों को कर्तव्य है। लेकिन जख्मी लोगों को अस्पताल पहुंचाने की बजाय अगर लोग सेल्फी या वीडियो शूट करते हैं, तो ये हमारे समाज का अमानवीय चेहरा दिखाता है। ऐसे लोग जानबूझकर सड़क पर जाम लगाते हैं और तमाशा खड़ा करते हैं।
नोएडा ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 122 और 177 के तहत कार्रवाई की जाएगी। धारा 122 कहती है कि कोई भी व्यक्ति ऐसे स्थान या परिस्थितियों में किसी भी सार्वजनिक स्थान पर वाहन को छोड़ने की अनुमति नहीं देता, क्योंकि सार्वजनिक जगहों पर ऐसा करने से दूसरे लोगों के लिए असुविधा का कारण बन सकता है।
वहीं धारा 177 के मुताबिक जो कोई भी इस अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है, वह पहले अपराध के लिए दंडनीय होगा। उस पर पहली बार 100 रुपये का जुर्माना लगायया जा सकता है, वहीं दूसरी बार अगर ऐसा करते पकड़ा जाता है, तो जुर्माने की राशि को 300 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
नोएडा ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक सरकार ने हाल ही में मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किए हैं, जिसके बाद जुर्माने की राशि में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि अभी तक इसका आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों की पहचान वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जाएगी और 10 जून से यह नियम लागू किया जाएगा।