केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने निजी निवेश के साथ इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट का समर्थन किया है।
गडकरी ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए चौथे यूआईटीपी इंडिया बस सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा, "यदि कोई भारत में निवेश करने के लिए तैयार है, तो हम उसे एक शहर के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट दे सकते हैं, जहां वे अपनी बसों को बिजली से चला सकते हैं। बिजली के माध्यम से अपनी बसों को चलाने से उन्हें डीजल की तुलना में ज्यादा मुनाफा होगा। हालांकि, टिकट की कीमत पहले जितनी ही रहेगी। यह डीजल और बिजली के बीच की बचत के कारण एक आकर्षक परियोजना है।"
उन्होंने कहा कि यह देखा जाना बाकी है कि क्या माल वाहक वाहनों के लिए भी उसी तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है।
मंत्री ने आगे कहा, "इलेक्ट्रिक ट्राली बसें या रेलबस भारत में शुरू की जा सकती है। हमें तकनीकी रूप से यह पता लगाना होगा कि क्या हम सामान और ट्रकों को भी उसी प्रणाली पर ले जा सकते हैं। इससे आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ सकती है।"
केंद्रीय मंत्री ने सार्वजनिक परिवहन के लंदन मॉडल के बारे में भी बात की और कहा कि वह इसे लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार बस पोर्ट बनाने की भी योजना बना रही है। उन्होंने कहा, "हम बस पोर्ट बनाने की भी योजना बना रहे हैं जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य हैं। बस पोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के जरिए हवाई अड्डे की तरह विकसित किया जा सकता है।"