सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने देश के ऑटो उद्योग से कहा है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों की रूपरेखा तैयार करने के लिए किसी बाहरी एजेंसी से अध्ययन कराएं। नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 2023 से तिपहिया वाहन और 2025 से 150 सीसी तक दो पहिया वाहनों को बंद करने का प्रस्ताव दिया है।
पिछले महीने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में नीति आयोग ने दो हफ्ते बाद ठोस योजना के साथ फिर से आने के लिये कहा था, लेकिन वाहन निर्माताओं का कहना है कि उन्हें इस पर काम करने के लिये कम से कम 4 महीने का वक्त चाहिये।
हीरो मोटर कॉर्प, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया ने दो पहिया और तीपहिया वाहनों की जगह 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के नीति आयोग के प्रस्ताव का विरोध किया था। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रसेकरन ने भी कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लागू करने से पहले बहुवर्षीय रोडमैप के जरिये पूरे इकोसिस्टम को तैयार करने की जरूरत है।
वहीं नीति आयोग का कहना है कि जैसे ही ऑटो इंडस्ट्री अपनी स्टडी कर लेगी इसके बाद सरकार के साथ सलाह मशविरा किया जाएगा। वहीं स्टडी को लेकर ऑटो इंडस्ट्री का कहना है कि इसमें छह हफ्ते से लेकर दो महीने तक का वक्त लगेगा। उनका कहना है कि जैसे ही बाहरी एजेंसी अपनी स्टडी पूरी कर लेगी, उनकी सिफारिशों को सरकार के साथ साझा किया जाएगा। उनका कहना है कि इस घटनाक्रम को बीच का रास्ता निकालने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
ऑटो इंडस्ट्री का तर्क है कि टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिये। पहले उन्हें देश के सबसे प्रदूशित शहरों में लागू किया जाये, उसके बाद उचित समयसीमा में बाकी जगहों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को लागू किया जाए।
दोपहिया और तिपहिया वाहन निर्माताओं ने 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों को लागू करने के प्रस्ताव पर चिंता जताते हुए कहा था कि इस तरह के बदलाव से ऑटो उद्योग को खतरा हो सकता है। उन्होंने सरकार से गुजारिश की थी उन्हें बीएस6 उत्सजर्न मानक लागू होने के बाद उद्योग जगत को कुछ और वक्त दिया जाये।