नई कार या टू-व्हीलर खरीदना भारत में अगस्त से थोड़ा कम महंगा हो जाएगा। इंश्योरेंस इंडस्ट्री के विकास को नियंत्रित करने और देखने वाले भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने जून में एक नया नियम पारित किया था जिसके तहत लॉन्ग टर्म व्हीकल इंश्योरेंस (दीर्घकालिक वाहन बीमा) पैकेज पॉलिसी खरीदना अनिवार्य नहीं होगा।
नया नियम एक अगस्त से लागू होगा और प्रभावी रूप से देश में नए चार और दोपहिया वाहनों की ऑन-रोड कीमत में कमी आएगी।
मौजूदा समय में, चार-पहिया वाहनों के लिए लॉन्ग टर्म कॉम्प्रीहैंसिव पॉलिसी (दीर्घकालिक व्यापक नीति) तीन साल के लिए मिलती है, जबकि दोपहिया वाहनों के लिए पॉलिसी पांच साल के लिए अनिवार्य है। एक अगस्त से इन नियमों को खत्म कर दिया जाएगा और ग्राहकों को एक संयुक्त प्रारूप में लॉन्ग टर्म पॉलिसी के लिए तीन या पांच साल तक भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे नए वाहन के ओवरऑल ऑन-रोड कीमत के कम होनी की पूरी संभावना है।
अब पहले खरीदे जाने वाले तीन / पांच साल के अनिवार्य बीमा के बजाय, एक ग्राहक को अब थर्ड-पार्टी मोटर बीमा खरीदना अनिवार्य होगा, जो लंबी अवधि के लिए होगा। कार खरीदारों के लिए थर्ड-पार्टी कार बीमा पॉलिसी तीन साल के लिए अनिवार्य कर दी गई है। जबकि नए दोपहिया वाहन खरीदारों के लिए, थर्ड-पार्टी दोपहिया बीमा पॉलिसी को पांच साल के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
जहां तक वाहन के बीमा की बात है, ग्राहक के पास दो विकल्प होंगे। पहला, समग्र पॉलिसी खरीदने का विकल्प होगा जिसमें थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के साथ-साथ खुद के वाहन की क्षति शामिल होगा। दूसरा विकल्प सिर्फ खुद के वाहन की क्षति बीमा पॉलिसी होगा।