अभी तक 350 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले मोटरसाइकिल व स्कूटर की खरीदारी पर सर्विस टैक्स व वैट को मिलाकर लगभग 30 फीसदी का टैक्स लगता था। लेकिन अब ये सब जीएसटी 28 फीसद के दायरे में आएगा जिसके चलते स्कूटर व मोटरसाइकिल खरीदना लगभग 2 से तीन फीसदी तक सस्ता हो जाएगा। इसका फायदा जीएसटी लागू होने से पहले ही कंपनियों ने अपने ग्राहकों को देना शुरू कर दिया। लेकिन इससे छोटी गाड़ियां महंगी हो जाएंगी। ये महंगाई हालांकि बहुत कम होगी पर फिर भी तकनीकि रूप से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
1 जुलाई से जीएसटी के बाद 1200सीसी से 1500 सीसी के बीच की गाड़ियां, व हाईब्रिड कारें भी महंगी हो जाएंगी। इसके साथ ही गाड़ियों की सर्विस कराना अगले महीने से काफी महंगा हो जाएगा। जीएसटी के चलते अब ज्यादातर वाहनों की कैटेगिरी 28 फीसदी टैक्स के स्लैब में आ जाएंगे, इसमें अलग-अलग श्रेणी में वेरिएबल सेस किसी वाहन कटेगरी पर लगाया जाने का प्रावधान भी किया गया है। सब फोर मीटर कटेगरी के पेट्रोल मॉडल पर अब 1 फीसदी(1200 सीसी से कम) का सेस लगेगा जबकि डीजल कारों पर 3 फीसदी अतिरिक्त सेस लगेगा। इस बदलाव के बाद इन कारों के लिए जीएसटी की दरें कुल मिलाकर 29 व 31 फीसदी तक पहुंच जाएंगी। इसके चलते अब छोटी गाड़ियां थोड़ी सी महंगी हो जाएंगी।
मिड साइज और एसयूवी(जिसकी लंबाई 4 मीटर से ज्यादा और 1500 सीसी से कम इंजन) की कीमतों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसी गाड़ियों पर अब तक लगभग 43 फीसदी तक का टैक्स लगता है। 1500 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली गाड़ियों पर अब 50 फीसदी के बजाए 43 फीसदी टैक्स लगेगा इसका मतलब है कि बड़ी गाड़ियों की कीमत में लगभग 7 फीसदी तक की कमी आएगी। इन कारों पर जीएसटी के अलावा 15 फीसदी का अतिरिक्त कर लगेगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ाने के लिए व इन्हें उत्साहित करने के लिए इन्हें 12 फीसदी के टैक्स बैंड में रखा गया है। लेकिन इसमें आश्चर्य की बात ये है कि हाइब्रिड कारों को इससे दूर रखा गया है। इसके चलते हाइब्रिड कारों पर 28 फीसदी की जीएसटी व 15 फीसदी का अतिरिक्त कर लगेगा। इसका साफ मतलब है कि ये गाड़ियां अब खरीदनी महंगी पड़ेंगी। इसका साफ मतलब है कि सरकार अब क्लीन व ग्रीन वातावरण रखने वाली गाड़ियों पर ज्यादा फोकस कर रही है। इसके चलते टोयोटा, लेक्सस व हुंडई को झटका लग सकता है जिन्होंने हाइब्रिड वाहनों के लिए भारी-भरकम निवेश भारत में किया है।