जेडी पावर की स्टडी के मुताबिक इंडिया इनिशिअल क्वॉलिटी कंट्रोल (आईक्यूएस) के तहत 8 कैटेगरी में 200 समस्याओं पर कार खऱीदारों का फीडबैक लिया गया। इन कैटेगरीज में इंजन-ट्रांसमिशन, हीटिंग, वेंटिलेशन-कूलिंग, ड्राइविंग एक्सपीरियंस, एक्सटीरियर फीचर, इंटीरियर्स, कंट्रोल डिस्प्ले और इंटरटेनमेंट और नेविगेशन को शामिल किया गया। इन समस्याओं में से प्रत्येक का आकलन प्रति 100 कारों की समस्याओं (पीपी100) की संख्या के आधार पर किया गया था। वहीं कम पीपी100 का मतलब कार मालिक को कम समस्या का सामना करना पड़ा।
इस सेगमेंट में मारुति ऑल्टो टॉप पर रही और उसे पीपी100 में 77 अंक मिले, वहीं हुंडई की ईऑन को पीपी100 में 83 अंक मिले। वहीं इस सेगमेंट में औसत स्कोर पीपी100 में 92 अंक रहा।
वहीं इस सेगमेंट में मारुति सुजुकी वैगन आर टॉप पर रही। वैगन आर को पीपी100 में 72 अंक मिले, जबकि मारुति सुजुकी सिलेरियो पीपी100 में से 82 अंक मिले। गौरतलब है कि इस स्टडी में पुरानी वैगन आर का फीडबैक लिया गया है, क्योंकि नई वैगन आर इसी साल जनवरी में लॉन्च हुई थी।
प्रीमियम कॉम्पैक्ट हैचबैक सेगमेंट में फॉक्सवैगन पोलो को सबसे ज्यादा स्कोर पीपी100 में से 64 अंक मिले। वहीं मारुति बलेरो को पीपी100 में से 69 अंक मिले। वहीं सेगमेंट में औसत रेटिंग 81 अंकों की रही। वहीं इस स्टडी में पुरानी बलेनो को शामिल किया गया था।
Road test review of new maruti suzuki dzire
- फोटो : Amit Dwivedi
वहीं इस सेगमेंट में मारुति डिजायर टॉप पर रही, डिजायर को पीपी100 में से 68 अंक मिले, वहीं फॉक्सवैगन अमियो पीपी100 में से 85 अंक मिले। जबकि इस सेगमेंट का औसत स्कोर 84 अंकों का रहा।
हुंडई वरना इस सेगमेंट में पीपी100 में 72 अंक पाकर टॉप पर रही। जबकि होंडा सिटी को पीपी100 में 73 अंक मिले। वहीं इस सेगमेंट में औसत स्कोर 76 रहा।
इस सेगमेंट में महिन्द्रा बोलेरो और टोयोटा इनोवा क्रिस्टा के बीच टाई रहा। दोनों कारों को पीपी100 में से 67 अंक मिले। हालांकि दोनों कारों की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर रहा।
वहीं इस सेगमेंट में होंडा की WR-V और मारुकि सुजुकी विटारा ब्रेजा के बीच टाई रहा। दोनों कारों का औसत स्कोर पीपी100 में से 72 रहा। वहीं इस सेगमेंट का औसत स्कोर 75 रहा।
Maruti Suzuki S-Cross Facelift
इस सेगमेंट में मारुति की एस-क्रॉस ने बाजी मारी। एस-क्रॉस को पीपी100 में से 55 अंक मिले, वहीं हुंडई की क्रेटा का स्कोर पीपी100 में से 69 का रहा। जबकि औसत स्कोर 76 अंकों का रहा।
डीजल गाड़ियों की खरीद पर है रोक
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इसके अलावा डीजल कारों और पेट्रोल कारों के बीच भी कंपैरिजन किया गया। जिसमें ज्यादा सीसी वाले इंजन और कम कैपेसिटी वाले इंजनों के बीच मुकाबला रहा। रिपोर्ट में सामने आया कि पेट्रोल कारों के मुकाबले डीजर कारों में कम शिकायतें आईँ, डीजल कारों का स्कोर 77, वहीं पेट्रोल कारों का स्कोर 82 रहा। इसके अलावा कम इंजन कैपेसिटी वाली कारों में ज्यादा शिकायतें मिलीं और उनका स्कोर पीपी100 में 86 रहा, जबकि ज्यादा कैपेसिटी वाली कारों का स्कोर पीपी100 में से 75 रहा। वहीं ग्राहकों को ऑडियो, इंटरटेनमेंट और नेविगेशन से संबंधित कम शिकायतें रहीं।