suzuki jimny in ncap test
दरअसल यूरोपियन न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 1997 में हुई थी। यूरो एनसीएपी का काम है नई−नई कारों को तोड़ना। जी हां, कारों की मज़बूती उन्हें तोड़कर ही तो जांची जा सकती है, वहीं इस टेस्ट के तहत नई कारों का क्रैश-टेस्ट किया जाता है।
क्रैश टेस्ट यह जानने का तरीका है कि ड्राइवर, पैसेंजर और यहां तक कि पैदल यात्रियों के लिए भी वे कितनी सेफ हैं। इन्हीं पैमानों पर आमतौर पर पैसेंजर कारों और SUV का क्रैश टेस्ट होता है। जिसके तहत कारों को अलग-अलग एंगल से क्रैश किया जाता है। सभी टेस्ट क्रैश लैब में किए जाते हैं। ताकि टक्कर से जुड़े सभी आंकड़े रिकॉर्ड किए जा सकें। शुरू में जहां कई कार कंपनियों ने इस टेस्ट के परिणामों की आलोचना की, वहीं आज यह स्थिति है कि दुनियाभर में इस रेटिंग को आधिकारिक तौर पर माना जाता है।
इन पैमानों पर होता है टेस्ट...