भारत के वाणिज्य मंत्री ने वाहन निर्माताओं को टेक्नोलॉजी या ब्रांड नाम के इस्तेमाल करने पर विदेशी मूल कंपनियों के लिए रॉयल्टी भुगतान को कम करने के तरीके खोजने के लिए कहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दो सूत्रों ने इसे स्थानीय निवेश को बढ़ावा देने और बाहर जा रहे पैसे को कम करने की कोशिश कहा है।
भारत के प्रतिस्पर्धी ऑटो बाजार में, मारुति सुजुकी और ह्यूंदै मोटर्स जैसे बड़े कार निर्माताओं की स्थानीय इकाई जापान और दक्षिण कोरियाई में मूल कंपनियों को रॉयल्टी के रूप में लाखों डॉलर का भुगतान करती हैं, ताकि वे उनकी टेक्नोलॉजी और ब्रांड का उपयोग कार बनाने और बेचने के लिए कर सकें।
मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह कार निर्माता और ऑटो पार्ट्स निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में ऐसे भुगतानों की समीक्षा करने के लिए कहा था ताकि उन्हें कम किया जा सके।
एक सूत्र ने कहा, "बैठक के दौरान यह चिंता जताई गई थी कि पैसा बाहर जाने की मात्रा बहुत ज्यादा है, यहां तक कि पुरानी टेक्नोलॉजी के लिए भी, और इसके बारे में कुछ किया जाना चाहिए।"
रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने नाम जाहिर करने से मना कर दिया क्योंकि बातचीत निजी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय ने इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
भारत कई वर्षों से रॉयल्टी भुगतान पर सख्त कैप लगाने की वकालत करता रहा है, जो 2009 के बाद बहुत ज्यादा बढ़ गई थी जब विदेशी निवेश नियमों में ढील दी गई थी और ऐसे भुगतानों पर प्रतिबंध हटा दिया गया था।
देश के बाजार नियामक ने पिछले साल राजस्व के 2 फीसदी से अधिक भुगतान पर अंकुश लगाने का सुझाव दिया था। कुछ क्षेत्रों की शिकायतों के बाद और इस आशंका में कि यह विदेशी कंपनियों को निवेश या टेक्नोलॉजी साझा करने से रोकगा, आखिर में यह सीमा 5 फीसदी निर्धारित की गई थी।
हालांकि, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर अंकुश लगाकर देश को एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए नए सिरे से जोर दिया है। यह स्थानीय निवेश को बढ़ाना और विदेश में जा रहे पैसे को कम करना भी चाहता है।
हालांकि भारत उस राशि पर रोक नहीं लगाता है जिसे रॉयल्टी के रूप में भुगतान किया जा सकता है, स्थानीय स्तर पर सूचीबद्ध कंपनी द्वारा 5 फीसदी से अधिक राजस्व के भुगतान को शेयरधारकों के अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
सूचीबद्ध कंपनियां जैसे Maruti Suzuki (मारुति सुजुकी) और Bosch (बॉश), Schaeffler India (शेफेलर इंडिया) और Wabco (वाबको इंडिया) सहित अन्य निर्माता आमतौर पर अपने विदेशी मालिकों को 1 फीसदी से 5 फीसदी की रॉयल्टी का भुगतान करते हैं।
मारुति सुजुकी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2020 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अपनी मूल जापानी कंपनी सुजुकी मोटर को रॉयल्टी के रूप में 38.2 अरब रुपये (510 मिलियन डॉलर) का भुगतान किया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ह्यूंदै की स्थानीय इकाई जैसी निजी स्वामित्व वाली कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2019 में अपनी मूल दक्षिण कोरियाई कंपनी को रॉयल्टी के रूप में 11.2 अरब रुपये (150 मिलियन डॉलर) या राजस्व का 2.6 फीसदी भुगतान किया और टोयोटा मोटर्स की भारतीय कंपनी ने अपनी मूल जापानी कंपनी को 6.5 अरब रुपये (88 मिलियन डॉलर) या राजस्व का 3.4 फीसदी भुगतान किया।