हालांकि एडिटिव्स कई फॉर्म में आते हैं, जैसे इंजन और गियर के लिए अलग, वहीं फ्यूल के लिए अलग होते हैं। लेकिन फ्यूल एडिटिव्स से ही शुरूआत करना बेहतर होगा। फ्यूल एडिटिव्स न केवल आपकी गाड़ी की फ्यूल एफिशिअंसी बढ़ाएंगे बल्कि आपको गाड़ी की टॉप स्पीड और परफॉरमेंस में भी साफ अंतर दिखाई देगा। पेट्रोल और डीजल कारों के लिए अलग-अलग फ्यूल एडिटिव्स आते हैं। ये एडिटिव्स फ्यूल इंजेक्टर्स की सफाई करने के साथ प्रदूषण में भी कमी लाते हैं। इसके अलावा फ्यूल लाइन और फ्यूल टैंक में भी लगे पुराने जंग और वाइब्रेशन को भी खत्म करते हैं।
2000 किमी की लाइफ
इन फ्यूल एडिटिव्स को टैंक फुल कराने के बाद डाला जा सकता है। आमतौर पर 50 लीटर टैंक के लिए एक बोटल काफी होती है। वहीं तकरीबन 100 किमी चलने के बाद इसके फायदे दिखने शुरू होते हैं। इन एडिटिव्स की लाइफ तकरीबन 2 हजार किमी तक होती है। इसके बाद आपको नए सिरे से टैंक में डालना होगा। या फिर कुछ अंतराल के बाद आप इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इन्हें इस्तेमाल करने से पहले अपने मैकेनिक से सलाह-मशविरा जरूर करें। Fuel Additives भारतीय बाजार में ये बेहद आसानी से उपलब्ध हैं, इन्हें ऑनलाइऩ या ऑफलाइन खरीदा जा सकता है।
इसमें मौजूद ऑक्टेन बूस्टर्स फ्यूल को कंबस्ट करने में मदद करते हैं, जिससे इंजन की परफॉरमेंस में इजाफा होता है। इन एडिटिव्स में कुछ खास तत्व होते हैं, जो इंजन को बिना कोई नुकसान किए अंदर लगे जंग को घोल देता है, जिससे इंजन की स्मूदनेस बढ़ जाती है। वहीं इनके इस्तेमाल से इंजेक्टर्स के चारों तरक एक लेयर बन जाती है, जिससे वहां पर कार्बन नहीं लगता। लोगों का अनुभव है इन्हें इस्तेमाल करने के बाद इंजन वाइब्रेशन में 30 प्रतिशत तक की कमी आई, तो वहीं गाड़ी के पिकअप में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला। वहीं अगर आप लॉन्ग ड्राइव पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो इनका इस्तेमाल फायदेमंद होगा।