वहीं कुछ राज्यों ने अपने राज्य की ट्रैफिक पुलिस को हाई-टैक लेजर गन उपलब्ध कराई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये नई लेजर गन पुरानी रडार गन के मुकाबले ज्यादा एडवांस हैं। सरकार ने ऐसी 39 स्पीड गन खरीदी हैं, जिनकी कीमत 3.9 करोड़ रुपये है।
इन गनों की खासियत है कि ये न केवल साइज में बेहद छोटी हैं और ये एक साथ तीन अलग-अलग वाहनों को ट्रैक कर सकती हैं। वहीं इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि आम रडार गन के मुकाबले इनकी रेंज दोगुनी है। जहां आम रडार बेस्ड स्पीड ट्रैप्स की रैंज तकरीबन 500 मीटर होती है, वहीं लेजर बेस्ड एक किमी की दूरी से ही कार की रफ्तार भांप लेगी।
वहीं लेजर डिवाइसेज की रीडिंग बिल्कुल सटीक होती है। वहीं इन्हें हाथ से कंट्रोल किया जा सकता है और कोई ट्राइपॉड लगाने की जरूरी नहीं पड़ती। फिलहाल ट्रैफिक पुलिस ट्राइपॉड पर लगी डिवाइस को गाड़ी के पीछे लगा कर ओवर स्पीडिंग वाहनों पर निगाह रखती है। फिलहाल इनमें से 5 डिवाइसेज को अमेरिका से खरीदा गया है और अहमदाबाद पुलिस को सौंपा गया है।
वहीं यह स्पीड गन इंटरनेट से कनेक्ट हो सकती है और वाहन के स्वामी को फोटो समेत ई-चालान भेज सकती है। वहीं जरूरत पड़ने पर यह डिवाइस मौके पर चालान का प्रिंट निकाल सकती है। इसके अलावा यह डिवाइस ओवर स्पीड वाहनों के वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकती है।
फिलहाल गुजरात में इस तरह की लेजर बेस्ड गन का इस्तेमाल हो रहा है। इसके लिए वहां विशेष ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की गई। वहीं पुड़ुचेरी पुलिस के पास भी एडवांस लेजर बेस्ड गन हैं। उनके पास 16 ऐसी मशीनें हैं। जल्द ही देश के बाकी राज्यों में भी इस तरह की एडवांस गन को इस्तेमाल शुरू हो जाएगा।