सरकार के हाल ही में हेलमेट पर 18 प्रतिशत जीएसटी के प्रस्ताव को बहुत सारी रोड सेफ्टी ओर्गनाइजेशन्स तथा आईएसआई हेलमेट बनाने वाले मनुफैक्चर्स ने खारिज किया है। इसका मुख्यकारण है की देश में केवल 5 या 6 आईएसआई हेलमेट निर्माता हैं जिससे हेलमेट का संगठित कारोबार भारत में 1000 करोड़ का है। देश में अभी भी 90 प्रतिशत हेलमेट गैर कानूनी और असंगठित क्षेत्र के तहत बनते हैं जिससे सरकार को न तो कोई टैक्स मिलता है और न ही वो हेलमेट लोगों को सुरक्षित रख पाते हैं। ऐसे में अगर 18 प्रतिशत जीएसटी से हेलमेट पर लगाया गया तो इससे असंगठित क्षेत्र और मजबूत होगा और सरकार जिस रोड सेफ्टी की बात कर रही है वह अधर में पड़ जाएगा।
सरकार की इस घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आईएसआई हेलमेट मेन्यूफेक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं स्टील बर्ड हेलमेट के प्रबन्ध निदेशक राजीव कपूर ने बताया कि,"1000 करोड़ के इस उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू किया जाना प्रस्तावित है इस उद्योग को सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। इससे न केवल आईएसआई मार्का वाले हेलमेट उद्योग को धक्का लगेगा अपितु उनकी बिक्री के ग्राफ में भी कमी आएगी, लेकिन इससे असंगठित बाजार को सीधा बढ़ावा मिलेगा तथा सरकार का नए आईएसआई मानदण्डों तथा हेलमेट निर्माण में इसे आवश्यक करने का पूर्ण उद्देश्य विफल हो जाएगा।"
एसोसिएशन का मानना है कि 18 प्रतिशत जीएसटी के कारण लोग नकली हेलमेट खरीदेंगे और अपने जीवन को खतरे में डालेंगे। जैसा कि अध्ययन से पता चलता है देश में प्रतिदिन सड़क हादसों में औसत करीब 13 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। इनमें से कई मौत तो केवल हेलमेट नहीं पहनने या घटिया हेलमेट पहनने के कारण होती है। ऐसे देश में जहां लोग हेलमेट खरीदने को अनावश्यक वित्तीय भार समझते हों, इस स्थिति में 18 प्रतिशत जीएटी लागू करने से यह स्थिति और भी बिगड़ जाएगी। तथापि शून्य प्रतिशत जीएसटी से लोगों का विश्वास जीता जा सकेगा और वे अच्छी क्वालिटी के हेलमेट्स खरीद सकेंगे तथा आगे भी यह उन्हें और खरीदने के लिए प्रेरित करेगा।
सड़क सुरक्षा जागरूकता में जुटे कार्यकर्ता श्री उल्हास पीआर का मानना है कि 180 करोड़ रूपए की आय (1000 करोड़ के हेलमेट उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी) से सरकार सड़क सुरक्षा प्रस्तावों के विपरीत काम कर रही है, जिस योजना पर वह हजारों करोड़ रुपए का निवेश किया है। उनका कहना था कि यह 180 करोड़ रुपए ग्राहक की जेब से आएंगे नतीजतन इसका प्रभाव उनके वित्तीय बजट पर पड़ेगा।
हेलमेट एसोसिएशन की योजना इस प्रकार हेलमेट्स पर जीएसटी नहीं का प्रस्ताव सरकार को शीघ्र ही सौंपने की है। क्यों की हेलमेट सुरक्षा के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़े है, ऐसे में अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि इस मसले को जितना जल्द हो सके निपटा दिया जाए। ऐसोसिएशन के सदस्यो को आशा है कि सरकार अपने वादे को पूरा करेगी और अपने उन देशवासियों के बारे में विचार करेगी जिन्हें उचित कीमत पर प्रामाणिक हेलमेट्स खरीदने की जरूरत है ताकि वे सुरक्षित होकर गाड़ी की सवारी कर सकें।