सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने एप बेस्ड टैक्सी सर्विस देने वाली कंपनी ऊबर से चेन्नई के उन दो ड्राइवरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है, जिन्होंने एक दिव्यांग के साथ दुर्व्यवहार किया था।
मंत्रालय के दिव्यांग सशक्तीरण विभाग ने अरमान अली की उस फेसबुक पोस्ट को गंभीरता से लिया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि ऊबर के ड्राइवर ने मौखिक रूप से सहमति देने के 15 मिनट बाद ट्रिप कैंसिल कर दी थी, जबकि दूसरे ड्राइवर ने कार की पिछली सीट पर व्हीलचेयर को रखने से मना कर दिया था और उन्हें कैब से बाहर धक्का दिया और ट्रिप कैंसिल कर दी।
नेशनल सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ इम्प्लायमेंट ऑफ डिसएबल्ड पीपुल के निदेशक ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में ऊबर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया है कि 20 जून को असम के इस दिव्यांग ने उड़ान लेने के लिए जाते समय ऊबर कैब के ड्राइवरों के हाथों भेदभाव का सामना किया।
पत्र में लिखा है कि पहले ऊबर ड्राइवर ने उन्हें 10-15 मिनट तक इंतजार कराया और बाद में ट्रिप कैंसिल कर दी। जबकि दूसरे ड्राइवर ने उन्हें कार के अंदर तो आने दिया लेकिन व्हीलचेयर का कार में रखने इंकार करते हुए उन्हें बाहर धक्का दे दिया। पत्र में सीईओ से अनुरोध किया गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोषी ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की जाये। साथ ही ऊबर के ड्राइवरों को संवदेनशील बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
अली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि इस पूरी घटना के चलते उनकी उनकी फ्लाइट छूट गई और वे जरूरी बैठक में नहीं जा पाये। साथ ही, उन्हें फिर से टिकट बुक कराने के लिए 14 हजार रुपये खर्च करने पड़े।
अपनी पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी टैग किया था। अली ने बताया कि हालांकि ऊबर ने इस घटना के लिये माफी भी मांगी और कैंसिलेशन चार्ज के 45 रुपये लौटाने की पेशकश की।