ब्याज दरें घटने के बावजूद बैंक व अन्य वित्तीय संस्थान ऑटो लोन देने में सख्ती बरतने लगे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले जहां ऑटो लोन खारिज करने की दर तीन से पांच फीसदी होती थी, वहीं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लगातार डिफाल्ट होने के बाद अब यह दर 15 से 20 फीसदी पहुंच गई है। ऐसे में आप कार या अन्य कोई वाहन खरीदने के लिए आवेदन दे रहे हैं, तो कई तरह के एहतियात बरतना जरूरी है।
बैंकों ने भी सख्त किए नियम
दरअसल, आईएलएंडएफएस डिफाल्ट के बाद एनबीएफसी ने ऑटो लोन देने से हाथ खींच लिए हैं। जोखिम घटाने के लिए बैंकों ने भी नियम सख्त कर दिए हैं। ऑटो कंपनियों का कहना है कि मौजूदा हालात में हर पांच में से तीन आवेदन रद्द हो रहे हैं। बैंकों ने ग्राहकों के लिए भुगतान मार्जिन भी बढ़ा दिया है। इसके अलावा पहले गाड़ी की ऑन रोड कीमत पर लोन मिलता था, जो अब एक्स-शोरूम कीमत तक सिमट गया है। कुछ बैंकों ने अतिरिक्त कदम उठाते हुए कर्ज के लिए जरूरी सिबिल स्कोर भी बढ़ा दिया है। ऐसे में लोन देने से पहले जमा की जाने वाली डाउन पेमेंट का लोन टू रेशियो भी बैंकों ने बढ़ा दिया है।
देनी होगी बैंक गारंटी
अगर आपको बाइक या ऑटो जैसी छोटी गाड़ियों के लिए लोन चाहिए तो इसके लिए किसी प्रॉपर्टी के दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन बड़े वाहन जैसे ट्रैक्टर, कार, बस आदि के लिए लोन चाहिए तो बैंक या फाइनेंस कंपनी गारंटी के तौर पर आपसे संपत्ति के कागजात मांग सकते हैं। इस संपत्ति का 70 से 80 फीसदी मूल्य के बराबर लोन मिल जाएगा। ऑटो लोन पर लगने वाला ब्याज अलग-अलग हो सकता है। बैंक या फाइनेंस कंपनियां ब्याज का निर्धारण लोन की धनराशि, अवधि, आवेदक की संपत्ति के आधार पर करते हैं। सामान्य तौर पर ऑटो लोन की ब्याज दर 7 से 15 फीसदी के बीच होती है।
ये दस्तावेज जमा करना जरूरी
सबसे पहले आप लोन का आवेदन रद्द होने की वजह जानें। कई बार कम आय या पते का सत्यापन नहीं होने पर भी आवेदन रद्द हो जाता है।
सिबिल रिपोर्ट मंगाकर अपनी स्थिति को जानें, क्योंकि कम स्कोर पर आवेदन रद्द हो सकता है।
एक बैंक ने आवेदन रद्द किया है, तो आप दूसरे बैंक में जा सकते हैं।
लोन पर डाउन पेमेंट बढ़ाने से बैंक आसानी से आवेदन स्वीकार कर लेते हैं।
अपने साथ किसी गारंटर को शामिल करने से भी आपकी बात बन सकती है।