दिल्ली में प्रदूषण मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में ईपीसीए ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। अपनी रिपोर्ट में ईपीसीए ने कहा कि दिल्ली में पार्किंग की समस्या भी प्रदूषण को बढ़ावा देती है। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्रधिकरण ने प्रस्ताव दिया है कि एक से ज्यादा कारें रखने वालों से अतिरिक्त मासिक फीस वसूली जाए। ईपीसीए ने लाजपत नगर का हवाला देते हुए कहा कि यहां क्षमता से दोगुनी कारें हैं। लाजपत नगर में 1830 कारों के लिए पार्किंग की व्यवस्था है, जबकि 1689 अतिरिक्त कार पार्किंग की जरूरत है।
ईपीसीए ने लाजपत नगर को आधार बनाते हुए रिपोर्ट में लिखा है कि दिन के मुकाबले रात में गाड़ियों की संख्या कई गुना तक बढ़ जाती है। ईपीसीए के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने 16 जुलाई को संबंधित एजेंसियों सड़क परिवहन मंत्रालय, दिल्ली परिवहन विभाग के साथ बैठक की थी। जिसमें उत्सर्जन की निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग के क्रियान्वयन पर विचार विमर्श किया गया।
प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने बताया कि हॉंगकांग और चीन में ये तकनीक इस्तेमाल हो रही है, वहां रिमोट सेंसिंग मशीनें रोड साइड पर लगाई गई हैं। जिससे पार्टिकुलेट मैटर और अन्य जहरीली गैसें जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड NOx और सल्फर ऑक्साइड SOx का पता लगाता है। उन्होंने बताया कि कोलकाता और पुणे में इस तकनीक का इस्तेमाल रहा है और 1.76 लाख वाहनों पर इसका प्रयोग किया जा चुका है।
ईपीसीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क, परिवहन मंत्रालय को रिमोट सेंसिग प्रोग्राम के तहत उत्सर्जन पर नजर रखने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट में नियम बनाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली सरकार को इसे लागू करना चाहिए, जिसके बाद इसे दिल्ली-एनसीआर में भी लागू किया जा सकता है। वहीं दिल्ली सरकार इसके लिए जल्द ही ग्लोबल टेंडर जारी करने वाली है। रिमोट सेंसिंग तकनीक डीजल वाहनों का उत्सर्जन बताती है, इनके जरिए वाहनों के नंबर प्लेट को सेंसिंग किया जाता है। एक रिमोट सेंसिंग मशीन 2.5 करोड की है और दिल्ली के लिए कम से कम 10 मशीनों की जरूरत है।