वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में पेश रिपोर्ट में कहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता में सबसे बड़ी बाधा चार्जिंग है और वाहनों को पूरी तरह चार्ज करने में बहुत समय लगता है। यहां तक कि फिलहाल मौजूद फास्ट चार्जर भी एक इलेक्ट्रिक कार को पूरी चरह से चार्ज करने में कम से कम डेढ़ घंटा, जबकि धीमे चार्जर से चार्ज करने में कम के कम 8 घंटे लग जाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इस सबसे के अलावा देश में एक बड़ी समस्या यूनिवर्सल चार्जर्स की है। देश में यूनिवर्सल चार्जर्स स्टैंडर्ड्स नहीं हैं और ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने से निवेश में बढ़ोतरी होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों की धीमी हिस्सेदारी की एक वजह भारतीय सड़कों पर संसाधनों की कमी है।
हालांकि कुछ दिन पहले खबरें आई थीं कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को लेकर इंसेंटिव देने की योजना पर काम कर रही है। एनटीपीसी को जल्द ही चार्जिंग स्टेशंस के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का दिया जा सकता है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का दिल उसकी बैटरी होती है, और भारत में अधिक तापमान परिस्थितियों में अच्छी तरह काम कर सकने वाली उचित बैटरी टेक्नोलॉजी को डेवलेप करने की जरूरत है।
आर्थिक सर्वे में नीति आयोग के रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगर 2030 तक प्राइवेट कारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत, कमर्शियल कारों में 70 प्रतिशत, बसों में 40 प्रतिशत दो-पहिया और तिपहिया वाहनों में 80 प्रतिशत तक हिस्सेदारी पहुंच जाए तो कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 846 मिलियन टन और 474 मिलियन एमटीओई (million tonne of oil equivalent) की तेल बचाया जा सकता है।
आर्थिक सर्वे में नीति आयोग का हवाला देते हुए कहा है कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री इजाफा हुआ है। 2018 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की लगभग 54,800 यूनिट्स की बिक्री हुई।