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इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार की नीति क्या है, क्या गडकरी कोर्ट आकर बता सकते हैं: चीफ जस्टिस

Wed, 19 Feb 2020 03:36 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से चर्चा करने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि वे सभी सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को एक निश्चित अवधि के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए की केंद्र की नीति से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट बुधवार को (आज) सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें सभी सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की अपनी नीति को लागू करने की मांग की गई थी। 
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जस्टिस एसए बोबडे (फाइल) - फोटो : wiki
उच्चतम न्यायालय ने वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से, सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों और सरकारी वाहनों की जगह क्रमिक रूप से विद्युत चालित वाहन (ईवी) लाने के मुद्दे पर बुधवार को इच्छा जताई कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री इस विषय पर न्यायालय में आकर बातचीत करें।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिरिक्त सालीसिटर जनरल ए एन एस नादकर्णी से पूछा कि क्या मंत्री अदालत की सहायता के लिए बातचीत करने आ सकते हैं। 

Electric Vehicle
पीठ ने नादकर्णी से कहा, ‘‘क्या पर्यावरण मंत्री उच्चतम न्यायालय आ सकते हैं और बिजली अथवा हाइड्रोजन से चलने वाले गैर-प्रदूषणकारी वाहन लाने के प्रस्ताव पर जानकारी दे सकते हैं ?’’

नादकर्णी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री के आने का राजनीतिक कारणों से दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं के अदालत में उपस्थित होने में कुछ गलत नहीं है। 

चार्जिंग पॉइंट - फोटो : Social
पीठ ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि प्रशांत भूषण जी राजनीतिक शख्सियत हैं लेकिन वह मंत्री से जिरह करने नहीं जा रहे हैं।’’

इससे पहले सुनवाई के दौरान एनजीओ सीपीआईएल की ओर से भूषण ने कहा कि राष्ट्रीय ई-मोबिलिटी मिशन योजना, 2020 पेश की गयी थी जिसके अनुसार सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने थे। 

इलेक्ट्रिक वाहन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala
भूषण ने कहा कि योजना के अंतर्गत अधिकारियों को सब्सिडी मुहैया कराके बिजली चालित वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देना होगा। उन्हें मॉल तथा पेट्रोल पंप समेत सार्वजनिक स्थलों पर बिजली से चलने वाले वाहनों के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाने होंगे।

पीठ ने चार सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी और आदेश दिया कि इस दौरान बिजली चालित वाहनों से संबंधित सभी मुद्दों पर सरकार विचार करे।

Nitin Gadkari (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले जनवरी के महीने में सुप्रीम कोर्ट सार्वजनिक वाहनों, सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब कर चुका है। 

याचिका में वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने के लिए सभी सार्वजनिक वाहनों और सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की केंद्र की नीति के क्रियान्वयन का अनुरोध किया गया है।

Nitin Gadkari MG ZS EV - फोटो : Social Media
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से दायर यचिका का संज्ञान लेते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया था और सड़क परिवहन मंत्रालय को चार सप्ताह के अंदर नोटिस का जवाब देने को कहा था। 

Nitin Gadkari MG ZS EV - फोटो : Social Media
इस बीच सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी Energy Efficiency Services Limited (EESL) एनर्जी इफीशिएंसी सर्विसेज (ईईएसएल) ने विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों से 1000 इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने का टेंडर निकाला है, ताकी साल 2030 तक उसकी सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक वर्जन की हों।
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MG ZS EV delivery to EESL - फोटो : social media
पिछले महीने ही MG Motor ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार MG ZS EV की डिलीवरी EESL को की थी। EESL ने MG Motor को पांच MG ZS EV का ऑर्डर दिया था। कंपनी जल्द ही अन्य गाड़ियों की डिलीवरी करेगी। 
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