भारत सरकार के अधिकारी इस पर नजर बनाए हुए हैं। चीन सरकार बैटरी निर्माताओं को नई टेक्नोलॉजी वाली बैटरियों पर भारी सब्सिडी दे रही है, जिसके चलते चीनी कंपनियां पुराने मॉडल्स को भारत में डंप में कर रही हैं। मिंट की खबर के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि बैटरी टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है। जिसके चलते चीन में दोयम दर्जे के बैटरी निर्माता भारत में ये बैटरियां बेच रहे हैं, क्योंकि चीन में उनका कोई खरीदार नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि पुरानी बैटरियों का वहां कोई बाजार नहीं है, क्योंकि चीन नई तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरियां बनाने में लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि कुछ ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स से उन्हें शिकायतें मिली हैं। वहीं एक अन्य अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है।
चीनी कंपनियों की इस हरकत से भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के कार्यक्रम को जबरदस्त धक्का लग सकता है। मार्च में सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को तेजी से बढ़ावा देनने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स यानी फेम-2 योजना शुरू की थी।
एक अधिकारी ने बताया कि चीन इलेक्ट्रिक वाहनों पर 2010 से सब्सिडी दे रहा है, वे पहले ई-स्कूटर्स में शॉर्ट रेंज वाली छोटी बैटरियां लगाई जाती थीं, जो 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार देती थीं। लेकिन अब चीन ने लो-टेक्नोलॉजी वाली इन बैटरियों पर सब्सिडी देने पर रोक लगा दी है। अब चीन केवल हाई-रेंज वाली बैटरियों पर ही सब्सिडी दे रहा है। हर साल वे नई टेक्नोलॉजी पर सब्सिडी दे रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वे ऐसा पहले सोलर पैनल्स के मामलों में भी देख चुके हैं। इससे पहले भी खबरें आई थीं कि कुछ भारतीय कंपनियां कीमतों और समय के दबाव के चलते उनसे बैटरियां खरीद रही हैं। वहीं कंपनियों की हरकत को रोकने के लिए पहली एनडीए सरकार ने 2017 में घटिया क्वालिटी के सोलर उपकरणों को नष्ट करने का आदेश दिया था।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में बैटरी काफी अहम होती है। भारत में ऐसी कंपनियों को बढ़ावा देना होगा, जो बैटरी कैमिस्ट्री के साथ कम कीमत और यहां के वातावरण के हिसाब से काम करें। साथ ही सरकार को कड़े मानक बनाने होंगे, ताकि यहां की बैटरियों की दुनियाभर में प्रशंसा हो।
हालांकि भारत भी टेस्ला जैसी गीगा फैक्ट्रियों को बनाने की योजना को अंतिम रूप दे रहा है। जिसमें इन कंपनियों को कई तरह की आकर्षक छूट दी जाएगी। सरकार की इस योजना ने टेस्ला के साथ चीन की बड़ी बैटरी निर्माता कंपनी एंपेरेक्स टेक्नोलॉजी और बीवाईडी का ध्यान आकर्षित किया है और उन कंपनियों ने लीथियम आयन बैटरियां बनाने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है।