अगर आप कार बाजार से पुरानी कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर जरूर पढ़ लें। यूज्ड कार बाजार में इन दिनों कई तरह के फ्रॉड चल रहे हैं, जो आपके पुरानी कार खरीदने के अनुभव को कड़वा कर सकते हैं। वहीं ऑनलाइन कार बाजार भी इससे अछूता नहीं है। यहां तरह तरह की डील्स दिखा कर ग्राहकों के साथ ठगी की जाती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही स्कैम्स के बारे में...
ऑनलाइन कार का एड दिखा कर पहले संभावित ग्राहक को फंसाया जाता है और एड में ग्राहक से एडवांस पैसे ले आकर आने के लिए कहा जाता है। ऐसी तमाम घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कार देखने आए लोगों के साथ लूट की वारदातें हुई हैं। अगर ऑनलाइन एड में सेलर आपसे टोकन मनी लेकर आने के लिए कहता है, तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है। वहीं एडवांस में छोटी रकम दें और उसकी रिसीप्ट जरूर लें। वहीं अकसर ऐसा भी होता है कि कार बेचने वाला शख्स कई लोगों को कार दिखा कर एडवांस पैसे ले लेते हैं और रफुचक्कर हो जाते हैं।
कई लोग सोचते हैं कि कार के ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। लेकिन यह सोच गलत है। कार बेचने वाले ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ करके उसे पीछे कर देते हैं, ताकि कार कम चली हुई लगे और ज्यादा पैसे मिल जाएं। लेकिन इसकी काट है कि सर्विस सेंटर में कार की हिस्ट्री पता करें और दोनों रीडिंग्स का मिलान करें। इसके अलावा कार के VIN नंबर से डिटेल्स निकाली जा सकती हैं।
ऑनलाइन क्लासीफाइडस में यह स्कैम बेहद कॉमन है। लिस्टिंग में ठग कार खरीदने वालों को लुभाने के लिए फर्जी कार की फोटो और स्पैसिफिकेशंस डालते हैं। जिनमें कई फीचर्स का कोई अतापता नहीं होता। इनमें अक्सर पेट्रोल कारों का डीजल कह कर और मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कार को ऑटोमौटिक कह कर बेचा जाता है। इसलिए खरीदने से पहले अच्छे से पताकर लें।
पुरानी कारों के मामले में कभी भी पेपरवर्क में ढिलाई न बरतें। कई बार ऐसा होता है कि चोरी की गाड़ियों लोगों को बेच दी जाती हैं और जब पेपरवर्क की बात आती है, तो आनाकानी की जाती है। गाड़ी की इंस्पेक्शन के दौरान कागजातों को ठीक से जांच लें और असली रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस कापी देखने के बाद ही टोकन मनी दें। साथ ही बेचने वाले शख्स से एनओसी देने के लिए कहें। कार के रजिस्ट्रेशन को कार कंपनी सर्विस सेंटर पर जाकर भी चेक किया जा सकता है।
कार बेचने के नाम पर ठगी करने वाले अब पहले से स्मार्ट होते जा रहे हैं। पहले जब आप उनसे कार की सर्विस हिस्ट्री मांगते थे, तो फर्जी सर्विस के कागजात दिखा कर पल्ला झाड़ लेते थे। वहीं अब यह बहाना होता है कि कार कई जगह सर्विस हुई है, इसलिए उसके सर्विस डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। ऐसे में सेलर से वर्कशॉप्स का पता पूछ कर खुद वेरिफाई करें।
कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर करें। टेस्ट ड्राइव से पहले किसी मैकेनिक या किसी एक्सपर्ट फ्रेंड को साथ जरूर ले जाएं। कार की टेस्ट ड्राइव रात में न करें, हमेशा दिन में ही करें। अगर डीलर टेस्ट ड्राइव से मना करे तो समझ लें कि कुछ गड़बड़ है।
कार खरीदने के दौरान अगर कोई डीलर ये कहे कि केवल कैश चाहिए, तो उसे ऑनलाइन, डिमांड ड्राफ्ट या चेक के जरिए पेमेंट लेने को कहें। डीलर आपसे टैक्स का हवाला देकर कैश देने के लिए मनाने की कोशिश करेगा। वहीं जिसके नाम कार है उसी के अकाउंट में पेमेंट करें या डिमांड ड्राफ्ट बनवाएं।
अगर डीलर आपसे ये कहे कि कार का मालिक यहां नहीं है और फोन पर बात कर लें, तो उससे कहें कि जब वे उपलब्ध होंगे तभी आगे बातचीत करेंगे। वहीं सेल पेपर जैसे डॉक्यूमेंट्स भी सामने ही साइन करवाएं। कुल मिला कर यह कि यह अच्छे से जांच कि जो कार आप ले रहे हैं आप उसके असली मालिक से ही मिल रहें हैं, न कि किसी ठग से। चाहें तो मालिक का वेरिफिकेशन करने के लिए सोशल मीडिया की भी मदद ले सकते हैं।