पॉलिसी में इस तरह का डैमेज कवर नहीं
राजू का कहना है कि उन्होंने 2012 में 60 लाख रुपये में Audi Q7 3.0 TDI लग्जरी एसयूवी खरीदी थी और उन्होंने इसका इंश्योरेंस भी करवाया था। 10 महीने बाद पानी भरने से सड़क पर जाम लगा हुआ था और 10 मिनट के भीतर बाढ़ के हालात पैदा हो गई और यातायात वहीं थम गया। बाढ़ का पानी उनकी गाड़ी के इंजन में पहुंच गया और गाड़ी बंद हो गई। गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन नहीं हुई। उन्होंने किसी तरह से कार को ऑडी की वर्कशॉप तक पहुंचाया।
बीमा कंपनी के सर्वेयर ने कार मुआयना किया और बताया कि हाइड्रोस्टेटिक के चलते कार बंद हो गई। इंश्योरेंस कंपनी का कहना था कि उसकी पॉलिसी में इस तरह का डैमेज कवर नहीं है और उन्होंने मुआवजा देने से इनकार कर दिया। बीमा कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि यदि गाड़ी को चलाया गया या जरूरी रिपेयर के बिना कार चलाने का प्रयास किया गया, तो इसका बोझ कार के मालिक पर पड़ेगा।
दिया 53 हजार रुपये मुआवजे का ऑफर
कंपनी ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया। कंपनी के सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इंजन इतनी आसानी से खराब नहीं होता है और कार मालिक ने हालात संभालने में गड़बड़ी की है। अगर वाहन मालिक कार स्टार्ट नहीं करता तो इंजन में हाइड्रोस्टेटिक लॉक नहीं लगता। जिसके चलते इंजन को ज्यादा नुकसान हुआ। कंपनी ने बदले में उन्हें 53 हजार रुपये मुआवजे का ऑफर किया।
जिसके बाद कार मालिक ने तेलंगाना स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रीड्रेसल कमीशन की शरण ली। कमीशन ने सुनवाई के दौरान कहा, केवल इसलिए कि कार सड़क पर बारिश या पानी में फंस गई, और हम स्टीयरिंग व्हील पर बैठे व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह कार को स्टार्ट करने का कोई प्रयास न करे। कोई भी हो ये स्वभाविक मानवीय प्रवृत्ति है कि कोई भी कार को दोबारा से स्टार्ट करने की कोशिश करेगा।
उन्होंने कहा कि लग्जरी कार की सर्विस कराने में ही 50 हजार रुपये खर्च होते हैं और कंपनी केवल 53 हजार रुपये रिपेयरिंग के लिए दे रही है। लगभग सात साल तक चले मुकदमे के बाद कमीशन ने बीमा कंपनी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और 7 फीसदी अतिरिक्त ब्याज के साथ चार हफ्तों में 17.54 लाख रुपये देने का आदेश दिया।
इरडा ने दिया था आदेश
वहीं भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने भी 1 सितंबर 2019 से कार और दो पहिया वाहनों के लिए अलग से डैमेज कवर लेने का आदेश जारी किया था। जिसमें प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, बाढ़, भूस्खलन के अलावा तोड़फोड़, दंगों जैसे हालातों में वाहनों को पहुंचने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अलग से बीमा कराया जा सकेगा। वहीं यह बीमा नए और पुराने वाहनों पर सालाना लागू होगा। साथ ही इरडा ने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक थर्ड पार्टी कवर नहीं होगा, कंपनियां न तो नई ऑन डैमेज कवर दे सकती हैं और न ही रिन्यू कर सकती हैं।