कोरोना वायरस से हुए नुकसान की भरपाई के लिए बजाज ऑटो ने एक नई रणनीति बनाई है। दरअसल भारत में कोरोना के बढ़ते मामले और बिक्री में गिरावट को देखते हुए कंपनी अपने निर्यात (एक्सपोर्ट) पर ध्यान केंद्रित करेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बजाज भारतीय बाजार में हुए नुकसान की भरपाई अपने निर्यात को बढ़ा कर करेगी। पुणे बेस्ड वाहन निर्माता बजार में ई-रिक्शा और छोटे कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री भी करती है। यह देश की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है, जिसके सबसे ज्यादा मोटरसाइकिल की बिक्री भारत से बाहर होती है।
बजाज के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना के कारण कंपनी के निर्यात पर भी असर पड़ा है। अधिकारी का कहना है कि भारत में तेजी से रिकवरी हो रही है, लेकिन कंपनी अपने निर्यात की रणनीति को और भी आक्रामक तरीके से बढ़ाएगी।
बजाज ऑटो के ऑफिशियल के मुताबिक कंपनी ने 18 महीनों के भीतर ब्राजील में एक असेंबली प्लांट खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही आसियान क्षेत्र में ऑपरेशन को बढ़ाने के लिए थाईलैंड में एक डिजाइन कार्यालय और यूरोप में एक अन्य डिजाइन कार्यालय बनाया जाएगा।
कंपनी बढ़ा रही है प्रोडक्शन
लॉकडाउन के बाद अब भारत में टू-व्हीलर की मांग में तेजी देखी जा रही है। इसको देखते हुए बड़ी दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने में लगी हुई हैं। इसके पीछे का कारण जून में दो-पहिया वाहनों की बिक्री का कोरोना से पहले के दौर के 60 से 80 फीसदी तक पहुंचा है। एक्सपर्ट्स की मानें तो शहर के मुकाबले गैर शहरी इलाकों में दो-पहिया वाहनों की मांग बढ़ी है। Emkay Global Financial Services नाम की रिसर्च फर्म के मुताबिक शादी के सीजन के चलते उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में दो-पहिया वाहनों की मांग बढ़ी है।
मोटरसाइकिल और स्कूटर्स की बढ़ती मांग को देखते हुए बजाज ऑटो भी अपना प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि अगस्त महीने में कंपनी 3,20,000 यूनिट्स से बढ़कर 3,50,000 यूनिट्स का प्रोडक्शन करेगी। हालांकि, बजाज ऑटो के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके औरंगाबाद कारखाने में प्रोडक्शन को बढ़ाने की है, जहां कोरोना से कई कर्मचारी संक्रमित हो गए।