फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणतंत्र दिवस विशेष: सात दशकों में भारत में कैसी फली-फूली ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री

Mon, 25 Jan 2021 06:31 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साल 1897 में भारतीय सड़क पर पहली बार कोई वाहन चली। और 2011 में भारतीय कार बाजार के सिर सबसे बड़ा सेहरा बंधा जब यह उत्पादन के मामले में दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन गया। आइए जानते हैं आजादी से लेकर अब तक भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का संक्षिप्त इतिहास।
 
विज्ञापन
गणतंत्र और विज्ञान: ऑटोमोबाइल सेक्टर - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार दुनिया में सबसे बड़ा बाजारों में से एक है। वाहनों की बिक्री की मात्रा और उत्पादन, दोनों के लिहाज से दुनिया में इसकी गिनती सबसे बड़ा ऑटो मार्केट में होती है। भारत में कार बाजार की ऐतिहासिक जड़ों की बात करें तो, यह जानना बहुत दिलचस्प होगा कि भारतीय सड़क जब पहली बार कोई वाहन चली तो वह साल था 1897.

विज्ञापन


भारत में साल 1930 तक वाहन बनाने का कोई प्लांट (विनिर्माण सुविधा) नहीं थी और कारों को सीधे विदेशों से आयात किया जाता था। विनिर्माण प्रक्रिया के लिहाज से 1940 का दशक ऐतिहासिक था। इस दशक में Hindustan Motors (हिंदुस्तान मोटर्स) और Premier (प्रीमियर) जैसी भारतीय कंपनियों ने अन्य कंपनियों की कारें बनानी शुरू कर दी। इस दशक के दौरान, Mahindra & Mahindra (महिंद्रा एंड महिंद्रा) ने भी UV (यूटिलिटी व्हीकल्स) बनाना शुरू किया।

पहली कार Ambassador का दौर

Ambassador Car - फोटो : Twitter (For Reference Only)
1947 में आजादी के तुरंत बाद, भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल उद्योग की मदद के लिए एक मोटर वाहन कंपोनेंट निर्माण उद्योग बनाने की कोशिश की। 1960 से 1980 के दशक तक, भारतीय बाजार में हिंदुस्तान मोटर्स का वर्चस्व था, जिसने अपनी Ambassador (एम्बैसेडर) कार के कारण बाजार में एक बड़ी हिस्सेदारी पर कब्जा कर लिया।

हालांकि, 1950 से 1960 के दशक के दौरान आयात पर निर्धारित व्यापार प्रतिबंधों के कारण ऑटो सेक्टर कुल मिलाकर धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा था। उद्योग जगत पर इस दमनकारी समय के तुरंत बाद, वाहनों की मांग बढ़ी लेकिन यह बहुत थोड़ी थी। मुख्य रूप से ट्रैक्टर और कमर्शियल वाहनों की मांग में कुछ हद तक इजाफा हुआ था। 

मारुति की एंट्री

first maruti 800 car owner harpal singh - फोटो : For Reference Only
1980 के दशक में, दो कंपनियों हिंदुस्तान मोटर्स और प्रीमियर को पहली बार चुनौती मिली, जब Maruti Udyog Limited (मारुति उद्योग लिमिटेड) ने भारतीय बाजार में एंट्री की। उदारीकरण के दौर के बाद, उन कार निर्माता की देश में एंट्री होने लगी, जिन्हें कठोर नीतियों के कारण भारतीय बाजार में निवेश करने की अनुमति नहीं थी। उदारीकरण के बाद, Maruti (मारुति) और Suzuki (सुजुकी) के बीच साझेदारी हुई। यह किसी भारतीय कंपनी और विदेशी कंपनी के बीच पहला संयुक्त उद्यम था।

धीरे-धीरे और लगातार हुए आर्थिक सुधारों की वजह से Hyundai (ह्यूंदै) और Honda (होंडा) जैसी प्रमुख विदेशी कंपनियां भारत में आईं और उन्होंने देश में अपनी उपस्थिति को मजबूत बनाया। साल 2000 से 2010 तक, लगभग हर प्रमुख कार कंपनी ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने उत्पादन प्लांट की स्थापना करके भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाया। 

भारत स्टेज का सफर

Maruti Suzuki 800 - फोटो : For Reference Only
2000 के दशक के शुरुआत में निर्माण प्रक्रिया के दौरान काम जारी था, उस अवधि में कारों का निर्यात काफी धीमा था। मारुति सुजुकी उन पहले कार ब्रांडों में शुमार थी जिन्होंने प्रमुख यूरोपीय बाजारों में वाहनों की बिक्री शुरू की थी। उसी दशक के दौरान, भारत सरकार ने वाहनों से पैदा होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अनिवार्य उत्सर्जन मानक लागू किए।

अपडेट किए गए इन दिशानिर्देशों को 'भारत स्टेज' के नाम से जाना जाता है और ये प्रमुख शहरों में लागू किए गए क्योंकि ये मानक कड़े यूरोपीय मानकों पर आधारित थे। मौजूदा समय में, भारत ने सीधे भारत स्टेज IV से छलांग लगाते हुए एक अप्रैल 2020 से भारत स्टेज VI लागू कर दिया है। 

भारत में कार उत्पादन

Automobile Industry - फोटो : PTI
इन वर्षों में, भारतीय कार बाजार ने कई उतार चढ़ाव देखे और धीरे-धीरे विकास किया है। क्योंकि देश में लगभग सभी प्रमुख कंपनियां मौजूद हैं। भारत अब ऑटो निर्माताओं के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए वाहन निर्माण का केंद्र बन गया है। भारत के तीन प्रमुख क्षेत्र जिनमें भारतीय कार उद्योग का अधिकांश हिस्सा मौजूद है वह दक्षिण भारत, पश्चिम भारत और उत्तर भारत में स्थित है।

दक्षिणी क्षेत्र में, चेन्नई व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र है जबकि मुंबई और पुणे का क्षेत्र दूसरे स्थान पर आता है। उत्तर के लिए, जहाँ तक उत्पादन सुविधाओं की सघनता का सवाल है, एनसीआर की हिस्सेदारी ठीक-ठाक कही जा सकती है। 
विज्ञापन

भारतीय ऑटो सेक्टर के सिर सेहरा

Auto Industry - फोटो : PTI
भारतीय कार उद्योग के कुछ सराहनीय कारनामों की सूची बनाई जाए तो, यह 2009 में जापान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड के बाद पैसेंजर कारों के चौथे सबसे बड़े निर्यातक के रूप में उभरा। जबकि 2010 में, भारत अपने पिछले साल के प्रदर्शन को दोहराते हुए एशिया में कारों का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया। भारतीय कार बाजार के सिर 2011 में सबसे बड़ा सेहरा बंधा जब यह उत्पादन के मामले में दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें