ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर ऐसे कैमरे लगाए गए हैं, जो यह देख सकते हैं कि कौन-सी कार का ड्राइवर अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त है। मौसम खराब हो या कार की स्पीड 300 किलोमीटर प्रति घंटा को छू रही हो, इन कैमरों की नजर से कोई कार बचकर नहीं निकल सकती। यह टेक्नोलॉजी कार की विंडशील्ड के अंदर झांकने में सक्षम है और फोटो खींच सकती है। रडार बेस्ड सेंसर सिस्टम से ऐसी कारों की पहचान आसान होती है।
सिडनी के प्रशासन का मानना है कि इन कैमरों से कार ड्राइवरों में व्यावहारिक बदलाव आएगा और दुर्घटनाएं रोकी जा सकेंगी। वहां करीब 70 फीसद ड्राइवर ऐसी लापरवाही करते हैं। ऑस्ट्रेलिया कानून सख्त है और 15000 रुपए के बराबर राशि जुर्माने के तौर पर वसूली जाती है,फिर भी लोग कार चलाते वक्त मोबाइल का उपयोग करते हैं। दिल्ली में भी 50 फीसद ड्राइवर ऐसा करते हैं। पिछले साल ही दिल्ली पुलिस ने ऐसे ड्राइवरों के 43 चालान रोज काटे हैं। हाल ही में हुए रोड सेफ्टी सर्वे में भी आधे ड्राइवर्स ने माना है कि वे कार चलाते वक्त मोबाइल का उपयोग करते हैं।
समझदार एअरबैग्स
ह्यूंदै और किआ एअर बैग्स की नई टेक्नोलॉजी लाने पर काम कर रहे हैं। इससे रोड पर ड्राइवर सेफ्टी काफी हद तक बढ़ जाएगी। अमेरिका के नेशनल हाइवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन का मानना है कि यह एअरबैग्स हर तीसरे एक्सिडेंट में जान बचाने वाले साबित होंगे। इनका डेटा बताता है कि 30 प्रतिशत एक्सिडेंट्स में एक से ज्यादा झटके कार को लगते हैं। कार पोल पहले किसी दूसरी गाड़ी से टकराती है फिर पोल या पेड़ से टकराकर रुकती है।
नई टेक्नोलॉजी को यह जिम्मेदारी मिली है कि इस दूसरी टक्कर के वक्त भी ड्राइवर को एअर बैग्स सुरक्षा मिले। मल्टी कोलाइजन सिनेरियो में यह एअरबैग्स वाकई बड़ी भूमिका निभाएंगे।