CAFE III नियमों को लेकर Maruti Suzuki ने क्या कहा?
मारुति सुजुकी ने कहा कि नए नियम अलग-अलग पावरट्रेन तकनीकों और ईंधनों की भूमिका को मान्यता देते हैं। कंपनी के मुताबिक इससे कम उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए वाहन निर्माता कई तकनीकी रास्तों पर काम कर सकेंगे।
मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने कहा कि नियम विभिन्न पावरट्रेन और ईंधन तकनीकों के योगदान को मान्यता देते हैं, जिससे बहुआयामी अनुसंधान एवं विकास और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि CAFE III में शामिल क्रेडिट और डेबिट व्यवस्था पिछले CAFE-II ढांचे की तुलना में सुधार है।
Tata Motors को CAFE III से क्या उम्मीद है?
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने कहा कि शून्य-उत्सर्जन तकनीकों को लगातार मान्यता दिए जाने से भारत के स्वच्छ मोबिलिटी संक्रमण में इलेक्ट्रिफिकेशन की भूमिका मजबूत होती है।
कंपनी के एमडी और सीईओ शैलेश चंद्रा के अनुसार, नए ढांचे से मिलने वाली स्पष्टता और पूर्वानुमेयता उद्योग को निवेश की बेहतर योजना बनाने, नवाचार में तेजी लाने और ग्राहकों के लिए स्वच्छ मोबिलिटी समाधानों की व्यापक रेंज विकसित करने में मदद करेगी।
Hyundai ने नए CAFE नियमों में किस बात को महत्वपूर्ण बताया?
ह्यूंदै मोटर इंडिया ने नए नियमों से मिलने वाली नियामकीय स्पष्टता को प्रमुखता दी है। कंपनी के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा कि नए नियम 3+2 साल के अनुपालन ब्लॉक के जरिए स्पष्ट और पूर्वानुमेय नियामकीय रोडमैप प्रदान करते हैं।
उनके मुताबिक, इससे वाहन निर्माता लंबी अवधि की उत्पाद और तकनीकी योजनाएं ज्यादा निश्चितता के साथ तैयार कर सकेंगे।
ह्यूंदै ने CAFE III के तकनीक-तटस्थ दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण बताया है। इसमें इलेक्ट्रिफिकेशन, वैकल्पिक ईंधन और ईंधन बचाने वाली उन्नत तकनीकों समेत कई रास्तों को मान्यता दी गई है।
CAFE III में ईंधन दक्षता का लक्ष्य कितना सख्त होगा?
CAFE III के तहत ईंधन खपत का बेंचमार्क 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटकर 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर हो जाएगा।
यानी अगले पांच वर्षों में यात्री वाहनों की औसत ईंधन दक्षता में 16.7 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य रखा गया है। वाहन निर्माताओं को अपने पूरे बेड़े के औसत ईंधन खपत लक्ष्य के अनुरूप प्रदर्शन करना होगा।
किन तकनीकों को CAFE III में प्रोत्साहन मिलेगा?
नए ढांचे में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV), प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहन को फ्लीट औसत की गणना में प्रोत्साहन दिया गया है।
इससे वाहन निर्माता केवल एक तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरत और उत्पाद रणनीति के अनुसार अलग-अलग पावरट्रेन को अपनाने की योजना बना सकते हैं।
CAFE III का क्रेडिट-डेबिट सिस्टम कैसे काम करेगा?
नए नियमों के तहत जो वाहन निर्माता अपने निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेंगे, वे क्रेडिट अर्जित कर उन्हें आगे ले जा सकेंगे। वहीं, लक्ष्य से पीछे रहने वाली कंपनियां पात्र क्रेडिट का इस्तेमाल या कारोबार करके अपनी कमी को पूरा कर सकेंगी।
इस व्यवस्था से कंपनियों को सख्त होते ईंधन दक्षता मानकों को पूरा करने में अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा।
अगले पांच वर्षों में कार कंपनियों की रणनीति पर क्या असर पड़ेगा?
CAFE III का नया ढांचा अगले पांच वर्षों में यात्री वाहन कंपनियों के तकनीकी मिश्रण और निवेश संबंधी फैसलों को प्रभावित करेगा। कंपनियों को सख्त होते ईंधन दक्षता और उत्सर्जन मानकों के बीच इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, वैकल्पिक ईंधन और ज्यादा दक्ष पारंपरिक पावरट्रेन में अपने निवेश का संतुलन तय करना होगा।
मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और ह्यूंदै मोटर इंडिया की प्रतिक्रियाओं से संकेत मिलता है कि उद्योग नए नियमों में उपलब्ध अलग-अलग तकनीकी विकल्पों और क्रेडिट व्यवस्था को अपनी आगामी उत्पाद एवं निवेश योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मान रहा है।