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Auto Sector: जीएसटी कटौती के बाद ऑटो कंपोनेंट सेक्टर को रफ्तार, मजबूत ऑर्डर बुक और मांग में तेजी की उम्मीद

Thu, 08 Jan 2026 04:35 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऑटो कंपोनेंट सेक्टर को मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन और हाल ही में जीएसटी में कटौती के बाद पैसेंजर गाड़ियों (PV), टू-व्हीलर्स (2W) और थ्री-व्हीलर्स (3W) की डिमांड में रिकवरी से फायदा होने की उम्मीद है।
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Car Plant - फोटो : Freepik
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विस्तार
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हालिया GST (जीएसटी) कटौती के बाद ऑटो सेक्टर में मांग के सुधरने के संकेत मिलने लगे हैं। और इसका सीधा फायदा ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री को मिलने की उम्मीद है। सेंट्रम की एक रिपोर्ट के अनुसार, पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में मांग में रिकवरी के चलते ऑटो कंपोनेंट कंपनियों के लिए ऑर्डर पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है। टैक्स में राहत से वाहनों की कीमतों पर दबाव कम हुआ है। जिससे उपभोक्ता मांग को सहारा मिला है और OEM (ओईएम) कंपनियों के साथ-साथ उनके सप्लायर्स के लिए भी बिक्री बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी है।
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बेयरिंग सेगमेंट को मिलेगा खास फायदा
रिपोर्ट में खासतौर पर बेयरिंग सेगमेंट को लेकर सकारात्मक रुख जताया गया है। बेयरिंग ऑटोमोबाइल के कई अहम सिस्टम्स में इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी कंपोनेंट है। जो वाहनों की स्मूद परफॉर्मेंस, एफिशिएंसी और टिकाऊपन सुनिश्चित करता है। सेंट्रम का कहना है कि जीएसटी कटौती के बाद पैसेंजर गाड़ियों (PV), टू-व्हीलर्स (2W) और थ्री-व्हीलर्स (3W) सेगमेंट में मांग बढ़ने से बेयरिंग कंपनियों को मजबूत ऑर्डर फ्लो का फायदा मिलेगा। जिससे उत्पादन और बिक्री दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।

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एक्सपोर्ट से बना रहेगा मजबूत सपोर्ट
घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात से मिलने वाली मजबूती भी ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए एक बड़ा सहारा बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी बाजारों से लगातार मिल रही मांग से कंपनियों की आय और प्लांट यूटिलाइजेशन बेहतर रहने की उम्मीद है। उच्च निर्यात वृद्धि को सेक्टर की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस को मजबूत करने वाला अहम फैक्टर माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब घरेलू मांग धीरे-धीरे स्थिर हो रही है।

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लोकलाइजेशन और डायवर्सिफिकेशन से बढ़ेगा संतुलन
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लोकलाइजेशन की दिशा में चल रहे प्रयास कंपनियों को अतिरिक्त बिक्री में मदद करेंगे। इसके साथ ही कई ऑटो कंपोनेंट कंपनियां अब रेलवे, प्रोसेस इंडस्ट्री, विंड एनर्जी और अन्य कोर इंडस्ट्रियल सेगमेंट्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। यह रणनीति उन्हें सिर्फ ऑटो सेक्टर पर निर्भर रहने से बचाएगी और मध्यम अवधि में कमाई को ज्यादा स्थिर बनाने में मदद करेगी।

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आगे का रास्ता मजबूत
सेंट्रम की रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर डिमांड विजिबिलिटी, मजबूत ऑर्डर बुक, एक्सपोर्ट ग्रोथ और अनुकूल लागत माहौल से ऑटो कंपोनेंट और बेयरिंग सेक्टर की मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है। कुल मिलाकर, मांग में रिकवरी, निर्यात की मजबूती, लोकलाइजेशन और डायवर्सिफिकेशन जैसे फैक्टर इस सेक्टर को आने वाले समय में एक मजबूत स्थिति में खड़ा करते नजर आ रहे हैं। 

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