वाहन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि लॉकडाउन के चलते देशभर में फैक्ट्रियों को बंद रखने से करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हो सकता है। बता दें कि वायरस को रोकने के लिए एक बार फिर लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। यानी 25 मार्च से 17 मई तक लॉकडाउन जारी है। इस दौरान 53 दिनों तक फैक्ट्रियां बंद हैं। हालाकि वाहन कंपनियों को उम्मीद है लॉकडाउन हटने के बाद एक बार फिर से फैक्ट्री में उत्पादन में तेजी आएगी। हालांकि इसके बावजूद इस पूरे साल में घाटे की भरपाई करना मुश्किल होगा।
कंपनियां पूरे दमखम से वापसी को तैयार
लॉकडाउन के कारण भारी नुकसान उठा चुकी वाहन कंपनियां पूरे दमखम से वापसी की तैयारी कर रही हैं। टोयोटा क्रिर्लोस्टर ने बताया कि गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए डीलरों के साथ बातचीत कर रहा है। कंपनियां अब सिर्फ अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए निर्यात पर भरोसा कर रही हैं। इस महीने सिर्फ 632 कारें ही निर्यात की जा सकी हैं। सरकार के दिशा निर्देशों में रहकर कंपनी अब अपने प्लांट में धीरे धीरे काम शुरू कर रही है। महिंद्रा एंड महिंद्रा की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस महीने कुल बिक्री में 98 फीसदी की गिरावट देखी गई है। घरेलू बाजार में एक भी गाड़ी नहीं बेचने वाली महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी सिर्फ 733 गाड़ियों का एक्सपोर्ट किया है।
ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प
लॉकडाउन के चलते डीलरशिप बंद होने से कुछ कंपनियां ऑनलाइन बुकिंग के भी विकल्प लेकर आई हैं। होंडा कार्स इंडिया ने "होंडा फ्राम होम" नाम के ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफार्म के जरिए ग्राहकों को नया विकल्प देने की कोशिश की है। वहीं जर्मनी की लक्जरी वाहन कंपनी ऑडी ने कोरोना से निपटने के प्रयासों ने आगे रहकर काम करने वाले ग्राहकों को निशुल्क वाहन जांच और उनके वाहनों को किटाणु मुक्त करने की सुविधा उन्हें सम्मान स्वरूप उपलब्ध कराने की घोषणा की है। ऑडी इंडिया ने कहा है कि वायरस से लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभा रहे उसके ग्राहकों को वाहन को किटाणु मुक्त करने, वाहन की सफाई के अलावा उनकी कार को लाने और पहुंचाने की सुविधा उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए दी जाएगी।
सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान
लॉकडाउन से सिर्फ वाहन उद्योग को ही नुकसान नहीं हुआ है बल्कि सरकार को भी राजस्व के मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना होगा। देशभर में वाहनों का उत्पादन बंद होने से सरकार को करीब 28 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा विभिन्न दूसरे मद में करीब 14 हजार करोड़ का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। गाड़ियों के पार्ट्स लेकर नई गाड़ियों की बिक्री से सरकार को जीएसटी मद में बड़ी कमाई होती है।