Volkswagen (फॉक्सवैगन) के लग्जरी डिवीजन Audi (ऑडी) के पूर्व प्रमुख ने मंगलवार को वाहन निर्माता के डीजल उत्सर्जन घोटाले से जुड़े आरोपों के लिए अपना दोष स्वीकार किया। जिससे वे अवैध सॉफ्टवेयर की मदद से उत्सर्जन परीक्षणों में धोखा देने वाली कारों पर दोषी ठहराए गए सबसे बड़ी रैंक वाले कार्यकारी बन गए। डीपीए समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रूपर्ट स्टैडलर ने अपने वकील द्वारा अदालत में पढ़े गए एक बयान का जवाब "हां" में दिया, जिसमें कहा गया था कि स्टैडलर ने गलत काम करना स्वीकार किया और इस धोखाधड़ी के सार्वजनिक होने के बाद भी हेराफेरी वाली कारों को बाजार से दूर रखने में अपनी नाकामी के लिए खेद व्यक्त किया।
स्टैडलर ने न्यायाधीश और अभियोजकों के साथ एक समझौते के तहत याचिका दर्ज की, जो जेल समय के बजाय प्रोबेशन (परिवीक्षा) प्रदान करता है। प्रोबेशन का अर्थ देखरेख के तहत अच्छे व्यवहार की अवधि के अधीन, किसी अपराधी को हिरासत से रिहा करना। इसके अलावा कोर्ट ने और अपराध के पूर्ण प्रवेश के बदले में उन्हें 1.1 मिलियन यूरो (1.2 मिलियन डॉलर) (लगभग 9.89 करोड़ रुपये) का जुर्माना देने का भी आदेश दिया है।
तीन निचले क्रम के प्रबंधकों ने भी म्यूनिख में 2 1/2-वर्षीय लंबे मुकदमे में दलील दी है।
स्टैडलर पर अभियोजकों द्वारा धोखाधड़ी और झूठे प्रमाणीकरण का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा था कि स्टैडलर ने सितंबर 2015 के बाद हेराफेरी वाले सॉफ्टवेयर वाली कारों को बेचने दिया था। यही वह समय था जब अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने हेराफेरी वाले सॉफ्टवेयर की खोज के बाद स्वच्छ वायु अधिनियम के तहत उल्लंघन का नोटिस जारी किया था।
सॉफ्टवेयर ने जब कारें टेस्टिंग पर थीं तब उत्सर्जन नियंत्रण को चालू कर दिया और जब कारों के सड़क पर पहुंची तो उन्हें बंद कर दिया। इसकी वजह से कारों ने निरीक्षण पास कर लिया, लेकिन इनसे नाइट्रोजन ऑक्साइड के अनुमानित स्तर से कई गुना ज्यादा उत्सर्जित हुआ। यह एक प्रदूषक जो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
इस घोटाले में फॉक्सवैगन को 30 अरब डॉलर (लगभग 24 खरब 72 अरब रुपये) से ज्यादा का जुर्माना और समझौता करना पड़ा और दो अमेरिकी अधिकारियों को जेल भेज दिया गया।
इसने पूरे ऑटो उद्योग का डीजल इंजनों से भरोसा तोड़ दिया, जो यूरोप में लगभग आधा ऑटो बाजार था, और इलेक्ट्रिक वाहनों में तेजी लाने में मदद की।
फॉक्सवैगन तब से सिर्फ बैटरी वाली कारों का दुनिया के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक बन गया है।
फॉक्सवैगन के पूर्व सीईओ मार्टिन विंटरकोर्न, जिन्होंने 2015 ईपीए घोषणा के चलते इस्तीफा दे दिया था, पर अमेरिका और जर्मन अधिकारियों द्वारा आरोप लगाया गया है, लेकिन जर्मनी आम तौर पर अपने नागरिकों को यूरोपीय संघ के बाहर के देशों में प्रत्यर्पित नहीं करता है। उनके खिलाफ जर्मन में भी कार्यवाही थम गई है क्योंकि उनका स्वास्थ्य खराब है।