इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) का क्रेज भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। लोग पेट्रोल-डीजल के महंगे खर्च और प्रदूषण से बचने के लिए इलेक्ट्रिक कारों को तेजी से अपना रहे हैं। लेकिन, नई ईवी खरीदने से पहले कई लोगों के मन में एक बड़ा डर होता है - "क्या इलेक्ट्रिक कार में जल्दी आग लग जाती है?"
हम सब जानते हैं कि पेट्रोल कार में आग लगने के लिए एक छोटी सी चिंगारी ही काफी होती है, लेकिन इलेक्ट्रिक कार में आग लगने की मुख्य वजह थर्मल रनवे होती है। आसान भाषा में कहें तो, जब बैटरी के किसी सेल का तापमान अचानक बहुत तेजी से बढ़ने लगता है, तो एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है जिससे आग लग जाती है। ऐसा आमतौर पर इन 3 कारणों से होता है:
इलेक्ट्रिक कार की बैटरी के अंदर अगर खारा पानी चला जाए, तो भी आग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। टेस्ला की कुछ कारों में ऐसे मामले देखे गए हैं। दरअसल, नमक वाला पानी बिजली का बहुत अच्छा सुचालक होता है। अगर यह पानी बैटरी की सील तोड़कर अंदर घुस जाए, तो शॉर्ट-सर्किट हो जाता है और बैटरी जलने लगती है।
आजकल की आधुनिक इलेक्ट्रिक कारें बेहद सुरक्षित बनाई जा रही हैं। बैटरी को एक्सीडेंट में टूटने से बचाने के लिए कड़े इंतजाम किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मर्सिडीज-बेंज की इलेक्ट्रिक G-Class में नीचे की तरफ कार्बन-फाइबर की बेहद मजबूत परत होती है। वहीं, ऑडी अपनी Q8 ई-ट्रॉन में बैटरी के चारों ओर एल्यूमिनियम का एक मजबूत ढांचा देती है ताकि एक्सीडेंट के वक्त बैटरी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
अलग-अलग देशों की सरकारी और स्वतंत्र संस्थाओं ने इस डर को दूर करने के लिए रिसर्च की है। इन सभी का नतीजा एक ही है- पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने की संभावना ना के बराबर है। देखिए 4 बड़े आंकड़े: