मौजूदा सड़क परिवहन व्यवस्था बड़े शहरों में अपनी सीमा पर पहुंच चुकी है। ऐसे में एडवांस एयर मोबिलिटी (AAM) यानी इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयर टैक्सी ट्रैवल टाइम घंटों से मिनटों में बदल सकती है। शहरी भीड़भाड़ कम कर सकती है और इमरजेंसी व मेडिकल सेवाओं को तेज बना सकती है।
दिल्ली-NCR में पायलट कॉरिडोर का प्लान
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII - Confederation of Indian Industry) ने सुझाव दिया है कि गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाला एक पायलट एयर टैक्सी कॉरिडोर बनाया जाए। इससे बिजनेस ट्रैवल आसान होगा, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर होगी, ट्रैफिक दबाव घटेगा और छतें वर्टीपोर्ट बनेंगी ।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पतालों, मेट्रो स्टेशनों और बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स की छतों से एयर टैक्सी संचालित हो सकती हैं। जमीन पर वर्टीपोर्ट बनाना महंगा और समयसाध्य है। साथ ही रूफटॉप वर्टीपोर्ट लागत-प्रभावी और स्केलेबल समाधान हैं। हालांकि, डीजीसीए (Directorate General of Civil Aviation ) नियमों के तहत अभी छतों से कमर्शियल उड़ान की अनुमति नहीं है, इसके लिए नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और सेफ्टी असेसमेंट जरूरी होंगे।
कैसे लागू होगा ये नियम?
रिपोर्ट में एयर टैक्सी को चरणों में लागू करने की बात कही गई है। यह तकनीक सीधे कमर्शियल इस्तेमाल में नहीं आएगी। इसके लिए फेज्ड अप्रोच (चरणबद्ध तरीका) सुझाया गया है।
ड्रोन डिलीवरी: सबसे पहले सामान की डिलीवरी।
मेडिकल लॉजिस्टिक्स: ऑर्गन ट्रांसपोर्ट (अंग दान) और इमरजेंसी मेडिकल सेवाएं।
एयर एम्बुलेंस: गंभीर मरीजों को ट्रैफिक से बचाकर अस्पताल पहुंचाना।
एयर टैक्सी: अंत में आम जनता के लिए टैक्सी सर्विस की शुरुआत।ड्रोन डिलीवरी
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रेगुलेशन और जिम्मेदारी किसकी?
सीआईआई ने सुझाव दिया है कि डीजीसीए के भीतर या अलग एक नई संस्था बनाई जाए, जो एडवांस एयर मोबिलिटी को रेगुलेट और मॉनिटर करे। इससे सुरक्षा और एयरस्पेस मैनेजमेंट सुनिश्चित हो सकेगी।
कौन उठाएगा खर्च?
इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड जुटाना एक चुनौती है। इसके लिए SIDBI SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) और अन्य सरकारी बैंकों के माध्यम से डेडिकेटेड फाइनेंसिंग टूल्स बनाने का सुझाव दिया गया है। वहीं, DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के भीतर एक नई संस्था बनाने की बात कही गई है जो इन उड़ानों के नियमों और सुरक्षा मानकों की निगरानी करेगी। वर्तमान में छतों से कमर्शियल उड़ान की अनुमति नहीं है, लेकिन नए फ्रेमवर्क पर काम तेजी से जारी है।