पूर्व दिशा
पूर्व दिशा के प्रतिनिधि सूर्य और स्वामी इंद्र हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में प्राणियों एवं वनस्पतियों की उत्पत्ति एवं पोषण सूर्य के द्वारा ही होता है। इसलिए घर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर होना अत्यंत शुभ माना गया है।
पूर्व दिशा क्या हो और क्या नहीं
जिस घर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर हो या पूर्व की ओर बड़ी-बड़ी खिड़कियां हों, तो उस घर में निवास करने वाले व्यक्तियों को अच्छे स्वास्थ्य के साथ पराक्रम, तेजस्विता, सुख-समृद्धि, बुद्धि-विवेक, धन-धन्य, भाग्य एवं गौरवपूर्ण जीवन की प्राप्ति होती है।
घर के पूर्व दिशा में कूड़ा-कचरा, पत्थर या मिटटी का ढेर नहीं रखना रखना चाहिए। इससे यश व प्रतिष्ठा में कमी आती है और संतान की हानि, विकलांग संतान का जन्म व पिता के सुख में कमी आती है। यदि आपके भवन की पूर्व दिशा में दोष हो तो धन का अपव्यय, ऋण, मानसिक अशांति, सिर से सम्बंधित रोग, हड्डी के टूटने एवं ह्रदय से सम्बंधित बीमारियां आदि होती हैं।
उत्तर दिशा के प्रतिनिधि ग्रह बुध व स्वामी कुबेर हैं। बुध जिस ग्रह के साथ होगा उसी के अनुसार आपको फल प्रदान करेगा। बुध यदि किसी शुभ ग्रह के साथ है तो शुभ और यदि अशुभ ग्रह के साथ है तो अशुभ फल प्रदान करता है। उत्तर दिशा व्यक्ति की बुद्धि, विद्या, ज्ञान एवं धन के लिए शुभ होती है।
- भवन में धन संचित करने का स्थान उत्तर दिशा में हो तो शुभ होता है। इस दिशा में खाली जगह छोड़ने से ननिहाल पक्ष से लाभ मिलता है। नौकर-चाकर, मित्र घर और विभिन्न प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है।
- उत्तर दिशा दोषपूर्ण रहने पर मातृ सुख, नौकर चाकर के सुख, भौतिक सुख आदि की कमी रहती है। साथ ही हार्निया, ह्रदय एवं सीने के रोग, चर्म रोग, गॉल ब्लैडर, पागलपन हैजे, फेफड़े एवं रक्त से सम्बंधित बीमारियों की सम्भावना रहती है।
पश्चिम दिशा के प्रतिनिधि ग्रह शनि और स्वामी वरुण हैं। शनि देवकाल पुरुष हैं। शनि मानव जीवन में सौभाग्य और दुर्भाग्य दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- यदि घर का मुख्य द्वार पूर्व में हो तथा पश्चिम दिशा में मिट्टी, चट्टान आदि हो तो ग्रह स्वामी की आमदनी अच्छी रहती है। परन्तु यदि पश्चिम दिशा में दोष हो तो मानसिक तनाव रहता है, कार्य में पूर्ण सफलता नहीं मिलती।
- भवन निर्माण के समय यह ध्यान रखना चाहिए कि घर या वर्षा का जल पश्चिम दिशा से बाहर न जाए। यदि घर की पश्चिम दिशा की दीवारों या फर्श में दरारें आदि हों तो गृह स्वामी की आमदनी अव्यवस्थित रहने की सम्भावना बनती है।
दक्षिण दिशा के प्रतिनिधि ग्रह मंगल व स्वामी यम हैं। मंगल ग्रह सभी प्राणियों को जीवन शक्ति, उत्साह, पराक्रम और स्फूर्ति प्रदान करता है। मंगल सांसारिक कार्यक्रम को संचालित करने वाली विशिष्ट जीवन दायनी शक्ति है।
भवन की दक्षिण दिशा में पुराना कबाड़, कचरा, या दरारें नहीं होनी चाहिए। दक्षिण दिशा के दोषपूर्ण होने पर स्त्रियों में गर्भपात, मासिक धर्म में अनियमितता, रक्त विकार, उच्च रक्तचाप सम्बंधित बीमारियों की सम्भावना बनती है। यदि यह दिशा दोषपूर्ण है तो नौकरी व्यवसाय में नुकसान, समाज में अपयश, पितृ सुख में अवरोध तथा सरकारी कार्यों में असफलता आदि की सम्भावना रहती है।