हिन्दू धर्म में पूजा या किसी धार्मिक अनुष्ठान में सामग्री के साथ-साथ कई वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है जैसे पानी,फूल ,दीपक, घँटी,शंख, आसन ,कलश आदि जिनका विशेष महत्व होता है। भारतीय संस्कृति में किसी अनुष्ठान में कलश की स्थापना की जाती है। किसी भी पूजा, त्योहार, संस्कार में सबसे पहले कलश स्थापना और पूजन के बिना कोई भी मंगलकार्य शुरू नहीं किया जाता है। कलश को समस्त ब्रह्राण्ड का प्रतीक माना जाता है क्योंकि ब्रह्राण्ड का आकार भी घट के सामान है। घट में समस्त सृष्टि का समावेश है इसमें सभी देवी- देवता,नदी,पर्वत,तीर्थ आदि मौजूद रहता है। कलश स्थापना का एक विधान है। इसे पूजा स्थल पर ईशान कोण में स्थापित किया जाना चाहिए। प्राय कलश तांबे का ही माना है। अगर यह उपलब्ध नहीं हो तो मिट्टी का भी प्रयोग किया जा सकता है।