अग्निकोण के देवता यानी दिशा का स्वामी अग्नि देव को कहा गया है। अब अगर आपने यहां गलती से जल संबंधी निर्माण कर दिया तो चन्द्रमा और शनि का विष योग जीवन को तबाह करने का काम करेगा।
वास्तु विज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जिसमें दिशाओं की ऊर्जा को महत्व दिया गया है। आज से लाखों वर्षों पहले हमारे ऋषि मुनियों ने पंचतत्व की ऊर्जा और मनुष्य के जीवन में पड़ने वाले उनके प्रभाव का अध्ययन कर लिया था इसलिए वास्तु को सबसे प्रमाणिक विज्ञान माना जाता है। इसे हम 2 उदाहरण से समझ सकते हैं।
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वास्तु में पृथ्वी तत्व का स्थान नेऋत्य कोण होता है। राहु को इस दिशा का स्वामी माना गया है। अब इस दिशा में नियम के अनुसार वजनदार चीजें रखनी होगी यानी कि आपका बेडरूम इस दिशा में हो तो अच्छा है या फिर कोई भारी वजनदार आलमारी भी इसी दिशा में रखी जा सकती है। अब आप सोचिए कि अगर आप इसी दिशा में अगर पानी की टंकी बना दें या बोरिंग कर दे तो ऊर्जा का पूरा संतुलन बिगड़ जाएगा। अब जो निर्माण आपको ईशान कोण में करवाना था वो आपने नेऋत्य कोण में कर दिया। अब इसके परिणाम स्वरूप घर के मालिक को धन हानि होगी और बच्चों को मानसिक तनाव होगा।
उदाहरण के लिए अग्निकोण के देवता यानी दिशा का स्वामी अग्नि देव को कहा गया है। अब अगर आपने यहां गलती से जल संबंधी निर्माण कर दिया तो चन्द्रमा और शनि का विष योग जीवन को तबाह करने का काम करेगा। दरअसल जब हम भूमि को खोदते हैं तो वास्तु में वो ऊर्जा शनि से जुड़ी होती है और जल का कारक चन्द्रमा है। अगर अग्नि कोण में जल होगा तो शनि चंद्र दोनों बिगड़ जाने है। ऐसा होने पर भयंकर पारिवारिक कलह आपको देखने को मिल सकती है इसलिए वास्तु एक ऐसा विज्ञान है जो पूर्ण वैज्ञानिक है।