सनातन परंपरा में दीपावली केवल दीप प्रज्वलन का पर्व नहीं, बल्कि यह घर, मन और वातावरण को पवित्र करने का अवसर है। इस दिन की गई लक्ष्मी पूजा तभी फलदायी मानी जाती है जब घर का वातावरण शुद्ध, ऊर्जा संतुलित और वास्तु सम्मत हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि कुछ नियमों का पालन किया जाए तो दीपावली पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास घर में होता है।
1. पूजन स्थल का सही स्थान चुनें
वास्तु के अनुसार दीपावली पूजन के लिए घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा को सबसे शुभ माना गया है। यह स्थान देवताओं का क्षेत्र कहा गया है। यदि यह दिशा उपलब्ध न हो तो पूजा कक्ष या ड्रॉइंग रूम के उत्तर-पूर्व भाग में पूजन करें। स्वयं पूजन करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
2. घर की शुद्धि और दीप सज्जा
पूजन से पहले पूरे घर की सफाई कर नींबू, नमक या गौमूत्र के जल से पोंछा लगाना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण और मंगल कलश स्थापित करें। घर के हर कोने में दीप जलाना चाहिए, विशेष रूप से मुख्य द्वार, तिजोरी, रसोई और तुलसी के पास दीपक अवश्य रखें। यह ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करता है।
3. लक्ष्मी प्रवेश द्वार का महत्व
मुख्य द्वार को साफ कर रंगोली, स्वस्तिक, ॐ और चरणचिह्न बनाना वास्तु में अत्यंत शुभ माना गया है। मां लक्ष्मी दक्षिण से उत्तर की ओर चलती हैं, अतः द्वार पर लक्ष्मी के चरणचिह्न घर के अंदर की ओर बनाए जाएं। दीपावली की रात द्वार पर जलता हुआ दीपक पूरी रात बुझना नहीं चाहिए, यह समृद्धि का प्रतीक है।
4. पूजन की विधि और आसन का महत्व
पूजन करते समय लाल या पीले कपड़े का आसन उपयोग करें। लकड़ी या धातु का आसन वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है। पूजा स्थल पर पांच दीपक रखें — एक तिल के तेल का दीप मां लक्ष्मी के दाईं ओर, दूसरा शुद्ध घी का दीप गणेशजी के सामने, तीसरा धन स्थान पर, चौथा रसोई में और पांचवां तुलसी के पास। ये पांच दीप पंचमहाभूतों का प्रतीक हैं और वातावरण में सात्त्विक ऊर्जा भरते हैं।
5. पूजन के पश्चात विशेष उपाय
लक्ष्मी पूजन के बाद घर के धन स्थान या तिजोरी में लाल कपड़े में रखी हल्दी, चावल और चांदी का सिक्का रखें। पूजा की थाली में रखे कमल पुष्प या कमलगट्टे को अगले दिन जल में प्रवाहित करने के बजाय तिजोरी में रखें, यह धनवृद्धि का संकेत देता है। पूजन के बाद दीपक को रसोई और मुख्य द्वार पर पुनः प्रज्वलित करें ताकि सकारात्मक ऊर्जा स्थायी रहे।