हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-उपासना होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर मां दुर्गा स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। नवरात्रि पर विशेष रूप से मां दुर्गा की पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है। नवरात्रि की तैयारियां बहुत पहले से होने लगती हैं। वास्तु नियमों के अनुसार नवरात्रि पर कलश स्थापना से लेकर ध्यान और मंत्रों का जाप तक अगर वास्तु के नियमों का पालन किया जाता है तो पूजा का संपूर्ण फल मिलता है वहीं अगर देवी उपासना में वास्तु के नियमों की अनदेखी होती है तो पूजा का फल उतना नहीं मिलता है जितना मिलना चाहिए। आइए जानते हैं नवरात्रि पर देवी उपासना में किन-किन वास्तु के नियमों का पालन करना चाहिए।
1. नवरात्रि पर पूजा स्थल की दिशा
नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि शुरू हो जाते हैं। सबसे पहले नवरात्रि पर देवी उपासना के लिए पूजा स्थल का चुनाव वास्तु के नियमों के अनुसार ही करना चाहिए। वास्तु के अनुसार देवी आराधना के लिए पूजा स्थल की दिशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व की दिशा सबसे ज्यादा शुभ मानी जाती है। वास्तु के अनुसार यह दिशा सबसे ज्यादा पवित्र, शुभ और सकारात्मक होती है। इस दिशा में पूजा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। ऐसे में नवरात्रि पर देवी उपासना के लिए स्थान का चुनाव ईशान कोण में ही करें। लेकिन किसी कारण से अगर यह दिशा उपलब्ध न हो तो उत्तर या पूर्व में किसी एक दिशा का चुनाव करना चाहिए।
2. मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र का स्थान
नवरात्रि पर मां दुर्गा की मूर्ति या फोटो का चुनाव करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार, देवी दुर्गा की मूर्ति को उत्तर-पूर्व की दिशा में इस तरह रखना चाहिए कि साधक का मुख पूरब या उत्तर दिशा की तरफ हो। इससे पूजा में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा।
3. पूजा के कमरे में होनी चाहिए हमेशा स्वच्छता और शुद्धता
नवरात्रि पर देवी दुर्गा 9 दिनों तक पृथ्वी लोक में निवास करती हैं और अपने भक्तों की पूजा से प्रसन्न होती है। नवरात्रि पर हर घर में माता की चौकी लगाई जाती हैं ऐसे में जिस कमरे में पूजा स्थल होगा वहां की शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान देना चाहिए। पूजा वाले कमरे में न तो किसी प्रकार की गंदगी होनी चाहिए और नहीं भोजन करना चाहिए। पूजा स्थल पर रोजाना साफ- सफाई करनी चाहिए और वहां अनावश्यक वस्त्र, जूते या गंदगी फैली नहीं होनी चाहिए।
4. कलश स्थापना का स्थान
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हुए विधि-विधान के साथ पूजा होती है। हिंदू धर्म में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। वास्तु में नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए पूजा स्थल पर कलश उत्तर-पूर्व की दिशा शुभ मानी जाती है। वहीं कलश में जटा नारियल और आम के पत्तों को जरूर रखें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है।
5. नवरात्रि पर देवी उपासना में आसन का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा करने और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। पाठ के दौरान कुशा, ऊन या रेशमी कपड़े के आसन पर बैठना शुभ माना जाता है। ऐसे में बिना आसन के देवी उपासना नहीं करनी चाहिए।
6. ध्यान और मंत्रोच्चार के लिए दिशा का चुनाव
वास्तुशास्त्र के अनुसार, ध्यान और मंत्रोच्चार के लिए भी ईशान कोण सबसे उत्तम होता है। यह स्थान मानसिक शांति और ध्यान के लिए आदर्श माना गया है।