मकान अथवा फैक्ट्री
बनाने के लिए जब आप जमीन खरीदते हैं तो सबसे पहले जमीन की जाँच करवा लेनी चाहिए।
वास्तु विज्ञान के अनुसार जमीन खरीदना जितना महत्वपूर्ण है उतना ही जरूरी है जमीन
की जांच। जमीन की दिशा सही हो लेकिन जमीन दोषपूर्ण हो तो ऐसे मकान एवं फैक्ट्री में
सुख और लाभ की बजाय कष्ट एवं हानि उठानी पड़ती है।
दोषपूर्ण जमीन में
निर्माण कार्य करवाते समय बार-बार बाधा आती है। जो व्यक्ति मकान या फैक्ट्री बनवा
रहा होता है उनका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है एवं आर्थिक परेशानियां आने लगती है। कई
बार दोष युक्त जमीन पर निर्माण कार्य करवाते समय समस्या नहीं आती है लेकिन बाद में
इसका दुष्प्रभाव नजर आने लगता है। इसलिए जमीन की जांच एवं वास्तु शांति करवाने के
बाद ही निर्माण कार्य करवाना चाहिए।
ऐसे होती है जमीन दोषपूर्ण
जमीन में
किसी मनुष्य अथवा पशु का कंकाल दबा होने पर अथवा उस जमीन पर किसी की मृत्यु होने पर
जमीन दोषपूर्ण हो जाता है। राजस्वला स्त्री का रक्त सना वस्त्र जमीन में दबा होने
पर या किसी व्यक्ति का मृतक संस्कार होने पर जमीन के अंदर नकारात्मक उर्जा का संचार
होने लगता है। इस उर्जा का प्रभाव दो मंजिल तक होता है।
दोष युक्त जमीन का
प्रभाव
देवी पुराण में कहा गया है कि गृह निर्माण कार्य शुरू करने पर मकान
बनवाने वाले व्यक्ति के शरीर में खुजाहट होने पर समझना चाहिए कि जमीन वास्तुदोष से
पीड़ित है। घर आरंभ करते ही या उस में जाने के तुंरत बाद नौकरी अथवा व्यापार में
नुकसान होना भी जमीन के दोषपूर्ण होने का संकेत होता है।
किस दिशा में है
दोष
वास्तु विज्ञान के अनुसार पूर्व दिशा में किसी मनुष्य की हड्डियां होने पर
गृह प्रवेश के 2-3 साल के भीतर परिवार के किसी सदस्य पर आपदा आ सकती है। दक्षिण
पूर्व में हड्डी होने पर सरकारी मामलों में व्यक्ति उलझता है। दक्षिण दिशा में दोष
होने पर गंभीर रोग होता है।
दक्षिण पश्चिम दिशा दोषपूर्ण होना संतान के लिए
कष्टकारी होता है। उत्तर दिशा में दोष होने पर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।
उत्तर पूर्व में दोष होने पर सम्पत्ति की हानि होती है। भूमि के मध्य दोष होने पर
परिवार पर संकट आता है।