तुलसी के पौधे का महत्व का उल्लेख कई हिंदू ग्रंथों और शास्त्रों में किया गया है। तुलसी के पौधे के कई गुण पद्मपुराण, ब्रह्मवैवर्त, स्कंद पुराण, भविष्य पुराण और गुरुड़ पुराण में बताए गए हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी भगवान विष्णु को अतिप्रिय हैं इसलिए इन्हें हरिवल्लभा कहा जाता है। भगवान विष्णु के विग्रह स्वरूप शालीग्राम के साथ तुलसी जी का विवाह किया जाता है। मान्यता है कि जब देवउठाउनी एकादशी पर भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं तब सबसे पहले हरिवल्लभा की पुकार सुनते हैं।
जिस घर में तुलसी लगी होती है, वहां सुख-समृद्घि का वास होता है। प्रतिदिन तुलसी पूजन से भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। नियमित रूप से तुलसी में दीपक जलाने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
तुलसी का पौधा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है लेकिन इसके साथ ही हनुमान जी की पूजा में भी तुलसी का प्रयोग किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक तुलसी के बिना हनुमान जी तृप्त नहीं होते हैं।
तुलसी को कभी भी अपवित्र या फिर बासी नहीं माना जाता है। इसे एक बार तोड़ने के बाद कई बार पूजा में प्रयोग किया जा सकता है।
सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के समय तुलसी के पत्ते को गंगाजल के साथ यदि व्यक्ति के मुंह में रखा जाए तो आत्मा को शांति प्राप्त होती है और बिना कष्ट के व्यक्ति जीवन के बंधनों से मुक्त हो जाता है, एवं उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।