जब एक खगोलीय पिंड दूसरे खगोलीय पिंड की छाया से ढक जाता है और पृथ्वी पर उससे आने वाला प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है, तब उसे ग्रहण कहा जाता है। इसे सीधे शब्दों में कहा जाए तो सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा परिक्रमा करते हुए एक ही सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा की छाया सूर्य पर पड़ने लगती है तब सूर्य ग्रहण पड़ता है। इसलिए ग्रहण लगना पूरी तरह से एक खगोलीय घटना होती है लेकिन इसका ज्योतिष और पौराणिक महत्व भी माना जाता है। ग्रहण दो तरह से लगता है एक पूर्ण और दूसरा आंशिक जब एक खगोलीय पिंड से दूसरा खगोलीय पिंड पूरी तरह से ढक जाता है और केवल उसके किनारे दिखते हैंं, जिसके कारण पूरी तरह से प्रकाश अवरूद्ध हो जाता है, तब वह पूर्ण ग्रहण कहलाता है। इसी तरह जब खगोलीय पिंड पर दूसरे पिंड की हल्की छाया पड़ती है और पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश पूरी तरह से अवरुद्ध नहीं होता है तो वह आंशिक ग्रहण कहलाता है। वर्ष 2021 का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को लगने जा रहा है। तो चलिए जानते हैं इस ग्रहण से जुड़ी खास बातें।