मौजूदा दौर में मानों बायोपिक फिल्मों की बहार सी आई हुई है और अहम बात ये कि लगभग सभी बायोपिक फिल्मों ने अच्छा कलेक्शन किया है। लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब बायोपिक फिल्में बनाने का साहस हर कोई नहीं जुटा पाता था। इसी तरह कभी घर-परिवार की कहानी वाली फिल्मों की लाईन लग जाती है और लगभग सभी फिल्में चल भी निकलती हैं, तो कभी ऐसा दौर भी आता है कि ऐसी फिल्मों के बारे में कोई सोच भी नहीं पाता है। कभी देश भक्ति की फिल्में खूब बनती हैं और अच्छा कलेक्शन भी करती हैं और कभी ऐसी फिल्मों को दर्शक ढूढ़ने से भी नहीं मिलते हैं। कुछ ऐसे ही कभी सामाजिक सरोकार की कमजोर कथानक पर बनी फिल्में भी चल निकलती हैं और कभी मजबूत कथानक वाली फिल्में भी असफल हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन से समय में कौन सी फिल्म चलेगी? अलग-अलग कहानियों के लिए समय कैसे तय किया जाए?
कहानी पर भी पड़ता है ग्रहों का असर
फिल्म की कहानी पर सर्वाधिक प्रभाव गुरु और शनि का पड़ता है। गुरु एक वर्ष तक एक राशि में रहता है और शनि ढाई वर्ष तक एक राशि में रहता है। गुरु के असर से फिल्मों से निकले संदेश की स्थिति प्रभावित होती है। जब गुरु बलवान होता है तो उन दिनों में संदेश प्रधान फिल्में दर्शकों द्वारा पसंद की जाती है। शनि की स्थिति से उसमें सामाजिक सरोकार के तत्व की मात्रा तय होती है और शनि की स्थिति से ज्ञात किया जा सकता है कि सामाजिक मुद्दों की फिल्मों की मांग कैसी रहेगी। इसी तरह सूर्य और चन्द्र के द्वारा समसामयिक विषयों पर बनी फिल्मों की सफलता और असफलता तय होती है। मंगल की स्थिति से ऐक्शन की मांग और बुध की स्थिति से नवीन प्रयोग की फिल्में सफल या असफल होती देखी जाती है। इसी तरह राहु व केतु की स्थिति से डरावनी फिल्में और शुक्र की स्थिति से फिल्म का वैभव, बजट, वितरण और दर्शकों का रुख प्रभावित होता देखा जाता है।
ग्रहों से तालमेल बिठाकर ही लिखें कहानी
गोचर में ग्रहों की जैसी स्थिति चल रही होती है, उस समय उन ग्रहों के अनुकूल कहानी वाली फिल्म अधिक सफल होती देखी गई है। जिन फिल्मकारों की कहानी अनायास या सोची समझी योजना के अनुसार समय विशेष पर ग्रहों के अनुकूल होती है, उनकी सफलता का प्रतिशत बढ़ जाता है और जिनकी फिल्में समय विशेष पर गोचर के ग्रहों के अनुकूल कहानी वाली नहीं होगी उनकी सफलता में कमी आती है।
इन विषयों के हिट होने की है संभावना
वर्तमान समय में गुरु तुला राशि में वक्री है, जिससे आने वाले निकट भविष्य में सामाजिक सरोकार की फिल्में, जिनमें गहरा संदेश होगा अथवा ऐसी फिल्में जो लोगों की आदतें बदलने में सहयोगी हो, सामाजिक और आर्थिक सुधार को सहयोग दे, जो फिल्म स्वरोजगार को बढ़ावा दें ऐसी कहानी वाली फिल्मों के अधिक सफल होने की संभावना बन रही है। इसी तरह वर्तमान में शनि धनु राशि में वक्री अवस्था में है, जिससे आडंबर और दिखावे के विरूद्ध फिल्में अच्छा कलेक्शन कर सकती है। किन्तु ग्रहों की स्थिति के आधार पर अगले अप्रैल में कुछ सप्ताह प्रयोगवादी फिल्मों की सफलता में संदेह है।
ऐसी कहानी से चमकेगी किस्मत
जो फिल्मकार इस दौरान सोची समझी योजना के तहत या फिर अनायास ही सही ज्योतिष के अनुकूल फिल्में बनायेंगें वह सफलता प्राप्त करेंगें। एक फिल्म जब सफल होती है तो उससे जुड़ी टीम को भी लाभ नाम और शोहरत मिलती है। अनुभव से देखा गया है की भाग्य के धनी फिल्मकार, कलाकार के साथ ऐसा संयोग बैठता है कि उनकी फिल्में और उनकी कहानियां ग्रहों के समयानुकूल अपने आप हो जाती हैं। किन्तु जब इनका भाग्य साथ छोड़ चुका होता है, तो वह ग्रहों की स्थिति के विपरीत स्वभाव की फिल्में बनाने लगते है। इस तरह कहा जा सकता है कि किसी भी फिल्म की सफलता या असफलता पर ग्रहों का पूरा प्रभाव पड़ता है।