शुक्र गोचर से मेष राशि पर प्रभाव
मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली के दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं। अब जब शुक्र का गोचर वृषभ राशि में हुआ है तो यह आपके दूसरे भाव में विराजमान होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र का दूसरे भाव में होना बहुत ही शुभ माना जाता है। कुंडली का दूसरा भाव धन का होता है और शुक्र का अपनी स्वराशि में होना यह आपकी आर्थिक स्थिति में इजाफा होने की तरफ संकेत हैं। शुक्र के वृषभ राशि में गोचर करने के कारण मेष राशि के जातकों को भौतिक सुख-सुविधाओं का लाभ मिलेगा। भोग-विलास और ऐशोआराम में आने वाले कुछ दिन व्यतीत होंगे। दोस्तों और परिजनों का भरपूर साथ आपको मिलेगा। इस दौरान आपको आर्थिक मामलों में लाभ और भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा।
ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को बहुत ही शुभ और लाभकारी ग्रह माना जाता है। कालपुरुष की कुंडली में यह दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह का गोचर एक से दूसरी राशि में होने के लिए करीब 27 दिनों का समय लगता है।
- शुक्र मीन राशि में उच्च के होते हैं जबकि कन्या राशि में नीच की अवस्था में होते हैं। इसके साथ सभी 27 नक्षत्रों में ये पूर्वाषाढ़ा, भरणी और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी होते हैं।
- शुक्र ग्रह की शनि और बुध ग्रह के साथ मित्रता का भाव रहता है जबकि चंद्रमा और सूर्य इनके शत्रु माने जाते हैं।
- शुक्र ग्रह कुंडली में जब अपनी स्वराशि यानी वृषभ या तुला में या फिर अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान होकर कुंडली के केंद्र भाव में होते हैं तो मालव्य राजयोग का निर्माण होता है। इस योग से व्यक्ति को जीवन में सभी तरह की सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।
- इसके अलावा एक दूसरा राजयोग बनता है लक्ष्मी नारायण राजयोग। इस में बुध और शुक्र की युति किसी भाव में बनने पर होती है।
- जिन लोगों की कुंडली में शुक्र कमजोर होते हैं, उनको जीवन में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- शुक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं।