सूर्य का मिथुन राशि में गोचर और प्रभाव
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Surya Gochar 2025: ग्रहों के राजा सूर्य अब 15 जून से लेकर 16 जुलाई तक बुधदेव के स्वामित्व वाली राशि मिथुन में विराजमान होंगे। सूर्य हर एक माह राशि परिवर्तन करते हैं जिसका प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष में सूर्य को ऊर्जा, अच्छी सेहत, पद-प्रतिष्ठा, सरकारी नौकरी और सफलता का कारक माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन करने से सभी 12 राशियों के ऊपर इसका प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं सूर्य के मिथुन राशि में गोचर करने से धनु राशि वालों के जीवन में किसी तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं।
धनु राशि पर सूर्य के गोचर का प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होते हैं और अब जब 15 जून से मिथुन राशि में गोचर किया है तब सूर्यदेव आपकी राशि से सप्तम भाव में मौजूद हैं। इस तरह का इस भाव के कारक तत्वों के आधार पर सूर्य का प्रभाव वैवाहिक जीवन और किसी के साथ साझेदारी में कर रहे जातकों पर देखने को मिलेगा। इस तरह से शादीशुदा लोगों के वैवाहिक जीवन में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। आपको इस दौरान लगातार अपने पार्टनर संग बातचीत करना होगा। करियर के लिहाज से सूर्य का गोचर कुछ शुभ प्रभावों में वृद्धि करा सकता है। इस दौरान जो लोग प्रेम संबंध में हैं वे अपने साथी के साथ अगर प्रेम विवाह में बंधना चाहते हैं तो यह गोचर बहुत ही लाभकारी साबित होगा।
Mithun Sankranti: सूर्य का मिथुन राशि में गोचर, जानें सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव
कुंडली में सूर्य ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व होता है। सनातन धर्म में सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है और सूर्य सभी जीव में जीवन के संचार का प्रमुख स्त्रोत है। कुंडली में सूर्य व्यक्ति के मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता, यश, प्रतिष्ठा, सफलता, उच्च पद, सरकारी नौकरी, साहस और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में सूर्य की मजबूती से व्यक्ति का व्यक्तित्व मजबूत होता है। कुंडली में अगर सूर्य उच्च अवस्था में हैं और शुभ ग्रहों की उस पर द्दष्टि पड़ रहा है तो व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। व्यक्ति ऊंचे मुकाम को हासिल करता है। व्यक्ति सरकारी और राजनीति के क्षेत्र में बहुत ऊंचे पद पर जाता है। वहीं जब सूर्य कुंडली में कमजोर अवस्था में रहता है तो व्यक्ति को सेहत संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।