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शरद पूर्णिमा पर चांद कब निकलेगा और और इस रात आसमान के नीचे क्यों रखते हैं खीर ?

Fri, 23 Oct 2026 01:55 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

25 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा है, इस रात को चांद अपनी सभी 16 कलाओं में परिपूर्ण होता है। शरद पूर्णिमा की रात को चांद की रोशनी के नीचे खीर रखने का क्या है महत्व और इस रात को कब निकलेगा चांद ?
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शरद पूर्णिमा का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदू धर्म में आश्विन माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस माह आने वाली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी और रास पूर्णिमा के नाम से जाता है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्तूबर को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात को चंद्रमा अपनी पूर्ण यानी 16 कलाओं से परिपूर्ण होताा है और इसकी किरणों से अमृततुल्य रोशनी निलकती है जो बहुत ही शुभ और फलदायी होती है। वहीं एक दूसरी मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों की पूजा और सेवा से प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। वहीं, शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण रासलीला करते हैं जिसके कारण से इसे रास पूर्णिमा कहते हैं। शरद पूर्णिमा पर खुले आसमान के नीचे खीर रखने की मान्यताएं है। इस रात को चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की रात को कब निकलेगा चांद और खीर क्यों रखते हैं समेत कई जानकारियां। 

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शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि, पूजा मुहुर्त और चंद्रोदय का समय 
द्रिक पंचाग के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा का त्योहार 25 अक्तूबर 2026 को है। ऐसे में आइए जानते हैं, शरद पूर्णिमा की प्रमुख तिथियां और मुहूर्त। 

  • पूर्णिमा तिथि की शुरुआत- 25 अक्तूबर को सुबह 11:55 मिनट से
  • पूर्मिमा तिथि का समापन-  26 अक्तूबर को सुबह 09 : 41 मिनट तक
  • चंद्रोदय का समय- करीब शाम 5:00 मिनट 
  • शरद पूर्णिमा पर शुभ योग- रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग
  • रवि योग सुबह 6:28 मिनट से शाम 7:22 मिनट तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 7: 22 मिनट से सुबह 6: 29 मिनट तक
  • शरद पूर्णिमा पर कोजागर पूजा- रात 11 : 40 से 12:31 मिनट तक
  • शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय- रात करीब 8 बजे 

शरद पूर्णिमा पर चांद कब निकलेगा ?
शरग पूर्णिमा पर चांद के दर्शन और पूजा का विशेष महत्व होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चांद करीर 5 के आसपास निकलेगा। लेकिन देश के अलग-अलग जगहों पर चांद के निकलने के समय में थोड़ा अंतर रह सकता है 

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शरद पूर्णिमा पर क्यों रखते हैं आसमान के नीचे खीर ?
शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने की मान्यता है और इस दिन चंद्रमा के दर्शन-पूजन का भी विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चांद की किरणों में अमृततुल्य तत्व मौजूद होता है। ऐसे में खीर में चांद की किरणें पड़ती हैं और उसमें अमृत प्रवेश होता है। फिर इस खीर को अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। 
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