हिंदू धर्म में आश्विन माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस माह आने वाली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी और रास पूर्णिमा के नाम से जाता है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्तूबर को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात को चंद्रमा अपनी पूर्ण यानी 16 कलाओं से परिपूर्ण होताा है और इसकी किरणों से अमृततुल्य रोशनी निलकती है जो बहुत ही शुभ और फलदायी होती है। वहीं एक दूसरी मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों की पूजा और सेवा से प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। वहीं, शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण रासलीला करते हैं जिसके कारण से इसे रास पूर्णिमा कहते हैं। शरद पूर्णिमा पर खुले आसमान के नीचे खीर रखने की मान्यताएं है। इस रात को चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की रात को कब निकलेगा चांद और खीर क्यों रखते हैं समेत कई जानकारियां।
शरद पूर्णिमा पर चांद कब निकलेगा ?
शरग पूर्णिमा पर चांद के दर्शन और पूजा का विशेष महत्व होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चांद करीर 5 के आसपास निकलेगा। लेकिन देश के अलग-अलग जगहों पर चांद के निकलने के समय में थोड़ा अंतर रह सकता है