वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्यायाधीश का दर्जा हासिल है। दरअसल शनि ऐसे ग्रह हैं जो व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यह सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले हैं, जो एक राशि में करीब ढाइ वर्षों तक रहते हैं, इसके अलावा ये समय-समय पर वक्री और मार्गी भी होते हैं। जब शनि वक्री यानी उल्टी चाल चलते हैं इसका प्रभाव देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर भी देखने को मिलता है। आपको बता दें शनि अभी कुछ महीनों तक वक्री ही रहेंगे, जिसके कारण कुछ राशि वालों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है।