ज्योतिष में शनिदेव को कर्मफलदाता, अनुशासन और न्याय का ग्रह माना जाता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं, ये एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं ,फिर इसके बाद राशि बदलते हैं। शनि की साढ़ेसाती बहुत ही कष्टकारी मानी जाती है और यह करीब साढ़े सात साल तक चलती है। जिसमें व्यक्ति को अपने कर्मों के आधार पर फल मिलता है। शनि जातकों को शुभ और अशुभ दोनों ही तरह के परिणाम देते हैं। शनि की मंद चाल के कारण परिणाम देर से मिलता है और संघर्ष भी देरी तक करने को मिलता है। शनि की साढ़ेसाती होने पर यह जातकों की कई तरह के परीक्षा लेता है। ऐसे में कुछ शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए कुछ गलत आदतों से बचना चाहिए।
इन आदतों से बढ़ता है शनि का प्रकोप
दुर्लभ और असहायों को सताने से बचें
जिन लोगों के ऊपर अगर साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है तो इस दौरान गरीबों, मजदूरों, कमजोर और असहाय लोगों को नहीं सताना चाहिए। कभी भी ऐसे लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए। ज्योतिष में शनि को कमजोर और मजदूरों का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में जो लोग शनि की साढेसाती के दौरान कमजोरों को किसी न किसी रूप से परेशान करते हैं उनको इससे बचना चाहिए। नहीं तो शनि का प्रतिकूल प्रभाव बढ़ता है।
गलत काम न करें
जो लोग चोरी, कपट, झूठ, जुआ और शराब जैसे दूसरे अनैतिक कार्य करते हैं उनको इससे बचना चाहिए। इस तरह के लोग को धोखाधड़ी, छल और बेईमानी से भी बचना चाहिए। ऐसे लोगों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती का बुरा प्रभाव पड़ता है।
आलसी ना बनें
शनि की साढ़ेसाती के दौरान आलस्य करने से बचें। इस दौरान किसी भी काम को ना टाले नहीं। हमेशा अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने पर फोकस बनाए रखें।
नियमों का पालन
जो लोग हमेशा नियमों का पालन करते हैं और किसी भी जरूरी कामों की अनदेखी करते हैं उनको शनि की साढ़ेसाती के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
गुस्सा करने से बचें
जो लोग छोटी-छोटी बातों में गुस्सा होते हैं, वाद-विवाद करते हैं और दूसरों संग अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं उनको शनि की साढ़ेसाती के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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