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Shani Jayanti 2024: शनि की टेढ़ी नजर में हैं ये पांच राशियां, शनि जयंती पर इस उपाय से मिलेगा मुक्ति

Mon, 03 Jun 2024 12:07 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

29 मार्च 2025 को शनि राशि परिवर्तन करेंगे तब कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेंगे जहां पर ये अगले ढाई वर्षों तक इसी राशि में रहेंगे।
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Shani Jayanti 2024: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 06 जून 2024 को है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Shani Jayanti 2024: वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को एक क्रूर ग्रह माना गया है। इसके अलावा शनि कर्मफलदाता और न्याय के कारक भी माने गए हैं। आम धारणा के मुताबिक शनि ग्रह का नाम आते ही लोगों के मन में भय व्याप्त हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि शनि की मात्र छाया पड़ने से व्यक्ति को तरह-तरह कष्टों से जूझना पड़ सकता है। शनि एक राशि से दूसरी राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते है जिसके कारण व्यक्ति के जीवन पर शनि का प्रभाव काफी समय तक रहता है। 

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी किसी जातक के जीवन में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा या अंतर्दशा आती है तो काफी परिवर्तन देखने को मिलता है। अगर व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत है तो व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की खुशियां, वैभव और ऐशोआराम का सुख मिलता है, लेकिन वहीं अगर कुंडली में शनि कमजोर हैं तो व्यक्ति को कष्टों का सामना करना पड़ता है। 

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इन राशियों पर है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
शनि की साढ़ेसाती 7 वर्षों तक होती है क्योंकि शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं, इसके अलावा शनि तुला राशि में उच्च के और मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि कर्मफलदाता हैं इस वजह से अच्छे कर्म करने वाले अच्छा फल वहीं बुरे कर्म करने पर बुरा फल देते हैं। शनि का राशि परिवर्तन ढाई वर्षों में होता है। शनि अभी अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं। 17 जनवरी 2023 से शनि कुंभ राशि में विराजमान हैं जो अभी तक इसी राशि में हैं। 29 मार्च 2025 को शनि राशि परिवर्तन करेंगे तब कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेंगे जहां पर ये अगले ढाई वर्षों तक इसी राशि में रहेंगे। आपको बता दें कि शनि के कुंभ राशि में मौजूद होने से मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, वहीं कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर शनि की ढैय्या चल रही है। 

कब से कब तक रहेगी इन राशियों पर साढ़ेसाती ?

मकर राशि पर साढ़ेसाती 
मकर राशि शनि देव की स्वयं की राशि होती है। इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का आखिरी चरण चल रहा है। आपको बता दें 26 जनवरी 2017 से शनि की साढ़ेसाती इस राशि पर शुरू हो गई थी। 29 मार्च 2025 को जैसे ही शनि का राशि परिवर्तन होगा इस पर से साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी।  

कुंभ राशि पर साढ़ेसाती 
वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण जारी है। 23 फरवरी 2028 तक कुंभ राशि पर साढे़साती का प्रभाव रहेगा। 

मीन राशि पर साढ़ेसाती
मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इसका प्रभाव 7 अप्रैल 2030 तक रहेगा। इसके बाद इस राशि के जातकों को साढ़ेसाती के प्रभाव से मुक्ति मिल जाएगी 

जानें बाकी राशियों पर कब से शुरू होगी साढ़ेसाती

मेष राशि पर साढ़ेसाती- 29 मार्च 2025 से 31 मई 2032 तक

वृषभ राशि पर साढ़ेसाती- 03 जून 2027 से 13 जुलाई 2034 तक

मिथुन राशि पर साढ़ेसाती- 08 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2036 तक

कर्क राशि पर साढ़ेसाती- 31 मई 2032 से 22 अक्तूबर 2038 तक

सिंह राशि पर साढ़ेसाती- 13 जुलाई 2034 से 29 जनवरी 2041 तक

कन्या राशि पर साढ़ेसाती- 27 अगस्त 2036 से 12 दिसंबर 2043 तक

तुला राशि पर साढ़ेसाती- 22 अक्तूबर 2038 से 08 दिसंबर 2046 तक

वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती- 28 जनवरी 2041 से 3 दिसंबर 2049 तक

धनु राशि पर साढ़ेसाती- 12 दिसंबर 2043 से 3 दिसंबर 2049 तक

शनि जयंती पर इन उपाय से करें शनिदेव को प्रसन्न और पाएं शनिदोष से मुक्ति
छाया दान

शनि ग्रह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए व शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैया या शनि की किसी भी प्रकार की पीड़ा से बचने के लिए छाया दान करना खास होता है। इस दिन एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में  कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं। 

शनि मंत्रों का जाप करें
शनि मंत्रों का जाप किसी की राशि में शनिदेव के साढ़ेसाती काल के प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही शनि देव के अन्य अवांछित प्रतिकूल प्रभावों को भी कम कर सकता है। इस दिन ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ और ‘ॐ शं शनिश्चरायै नमः’ इन दो मंत्रों का यथा शक्ति जाप करें। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि चालीसा और शनिदेव की आरती भी करें।
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हनुमानजी की पूजा
शनिदेव, हनुमानजी की पूजा करने वालों से सदैव अपनी कृपा दृष्टि रखते हैं, इसलिए इनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए।

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