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Shani Dev: जानें ज्योतिष में शनि ग्रह और उनका सामान्य परिचय

Thu, 27 Apr 2023 11:08 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्मशील ग्रह की संज्ञा दी गई है। शनि देव की मकर राशि का दशम भाव पर वहीं कुम्भ राशि का लाभ भाव पर अधिकार है। दशम भाव व्यक्ति के कर्म को दर्शाता है वही उससे आगे का भाव उसके फल को दर्शाता है।
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shanidev: शनि देव अपनी मकर राशि में सामान्य फल देने वाले होते हैं वही कुम्भ राशि उनकी मूल त्रिकोण राशि कही गई है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण सूत्र है और वो है फलित विचार, दरअसल भविष्य में होने वाली किसी भी घटना के बारे में विचार करने को फलित विचार कहते हैं। फलित सूत्र में नॉर्मली 9 ग्रह, 12 भाव और 27 नक्षत्रों से विचार किया जाता है। फलित में 9 ग्रह हैं, सूर्य,चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ये 7 मूल ग्रह माने गये हैं वहीं 2 ग्रह राहु केतु छाया ग्रह माने गए हैं। राहु केतु सदैव एक दूसरे से सप्तम होते हैं और विपरीत यानी वक्री गति से ही चलते हैं तो आइये जानते हैं  शनि ग्रह के बारे में और साथ ही यह भी जानेंगे कि ज्योतिष में उसकी क्या उपयोगिता है। 

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वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्मशील ग्रह की संज्ञा दी गई है। शनि देव की मकर राशि का दशम भाव पर वहीं कुम्भ राशि का लाभ भाव पर अधिकार है। दशम भाव व्यक्ति के कर्म को दर्शाता है वही उससे आगे का भाव उसके फल को दर्शाता है। इसलिए जाहिर सी बात है कि शनि कर्म और उसका फल देने वाले ग्रह कहे गए हैं। शनि देव को अष्टम भाव का कारक माना गया है यानी कि वो व्यक्ति की सेहत और जीवन के भी कारक है। सिर्फ शनि एक ऐसे ग्रह हैं जिन्हे अष्टम में जाने का दोष नहीं लगता है। वो जब अष्टम भाव में विराजमान होते हैं तो जातक की छिपी हुई विद्या से रूबरू करवाते हैं। शनि देव अपनी मकर राशि में सामान्य फल देने वाले होते हैं वही कुम्भ राशि उनकी मूल त्रिकोण राशि कही गई है। 

मेष राशि में शनि देव नीच के हो जाते हैं यानी कि किसी भी प्रकार के शुभ फल देने में समर्थ नहीं होते, वहीं शुक्र की मूल त्रिकोण राशि तुला में शनि देव उच्च के होकर जातक को अच्छे परिणाम देते हैं। शनि एक पाप ग्रह है इसलिए नियम के अनुसार ये उपचय भाव यानी कि 3, 6 और 11भाव में शानदार परिणाम देने वाले कहे गए हैं। शनि देव की कृपा से जातक को रहस्य में रूचि होती है और वो संसार के कई नियमों से परे जाकर सोचता है। शनि देव को राजनीति और सत्ता का भी सुख देने वाला कहा गया है। जनता का कारक शनि है इसलिए जब किसी जातक का शनि राजयोग कारक होकर कुंडली में विराजमान होते हैं तो ऐसा व्यक्ति जनता का अपार समर्थन प्राप्त करता है। 
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शनि देव को निम्न वर्ग और गरीब वर्ग का कारक भी कहा गया है इसलिए जो जातक इनकी सेवा करता है उसे शनि देव कभी परेशान नहीं करते हैं। शनि से प्रभावित व्यक्ति बड़े पद पर आसीन होते हैं। लोहे का काम, खदान, कबाड़ का काम, तेल की मिल, सरसों का काम ये सब शनि देव के ही कारक माने गए है। कुंडली में शनि बढ़िया नहीं हो तो फैक्ट्री बंद होने की नौबत आ जाती है। पुष्य,अनुराधा और उत्तराभाद्रपद ये शनि के नक्षत्र कहे गए हैं। जो इन नक्षत्र में जन्म लेता है उस पर शनि का प्रभाव दिखाई पड़ता है वहीं कुम्भ लग्न और मकर लग्न पर भी शनि का प्रभाव होगा। 

शनि प्रधान जातक जीवन के 32वें वर्ष के बाद उच्च पद को प्राप्त करने वाले और बेहद मेहनती होंगे। शनि सूर्य, मंगल, राहु, केतु और शुक्र के साथ शुभ नहीं होता है। शनि अगर किसी को परेशान कर रहा हो तो जातक को पीपल के पेड़ और हनुमान जी की सेवा करनी चाहिए।
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