सप्तशती का करें पाठ
आचार्य संतोष 'संतोषी' ने कहा यदि कोई व्यक्ति अच्छा नहीं कमा पा रहा है, तो उसे एक बार अपनी कुंडली दिखा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी क्षमता और कीमत खुद तय करनी चाहिए। साथ ही पूजा के समय हमेशा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। यह देवी को प्रसन्न करने का पाठ है।
सॉफ्टवेयर से हमे बेहतरीन लाभ मिला है लेकिन फलित के लिए किसी विद्वान से मिलन ही चाहिए। ज्योतिषी ही अपने विवेक का इस्तेमाल करके ही फलित करेगा।
क्या राहु-केतु से डरने की जरूरत है?
युवराज राजौरिया ने कहा कि हमारे पास कई बच्चे सीखने आते हैं। वो बहुत तेजी से सीखते हैं। ज्योतिष में गजब के सूत्र हैं। राहु-केतु छाया ग्रह हैं। लोगों में इनका भय बना रहता है। राहु-केतु से डरने की जरूरत नहीं है। ये इतने भयकारक नहीं है। जन्म के समय ग्रह-नक्षत्रों की दशा के अनुरूप नाम रखा जाता है। उसका महत्व भी रहता है। हस्तरेखा भी प्रभावी माध्यम है। हस्तरेखाएं जन्म से आती हैं। मस्तिष्क रेखा देखकर बता सकते हैं कि व्यक्ति कितना प्रतिभावान है। यदि किसी की जीवन रेखा बीच में टूटी हो तो आशंकाएं रहती हैं, लेकिन हृदय रेखा मजबूत है तो वह जीवन रेखा पर हावी रहती है।
उन्होंने कहा कि जब तक आप ज्योतिष को जानेंगे नहीं, तब तक इसे मान भी नहीं पाएंगे। यहां तक कि आयुर्वेद भी ज्योतिष विधा के नक्षत्रों पर निर्भर है। युवाओं को ज्योतिष से जोड़ेंगे तो इसका प्रसार बढ़ेगा। लोग ज्योतिषी बन तो जाते हैं, लेकिन आपकी ऊर्जा और तप-बल से वह विद्या आगे बढ़ती है। कर्मकांड और ज्योतिष दोनों अलग-अलग विधाएं हैं। ज्योतिष वेदों का नेत्र है और नेत्र का काम सिर्फ देखना है। अगर आप मंत्र शक्तियों की तरफ आगे बढ़ते हैं तो तप-बल मजबूत होता है। सॉफ्टवेयर से हमें सबसे बेहतरीन लाभ यह मिलता है कि हम गणना करने से बच जाते हैं। गणना का काम सॉफ्टवेयर से होने लगा है। हालांकि, फलित ज्योतिष के लिए तो आपको ज्योतिषी के पास ही जाना होगा। AI अब तक सटीक फलित ज्योतिष में नहीं आ सका है। जो सोचा और हो जाए, वही भाग्य है। जो सोचा और नहीं हो पाया, वही दुर्भाग्य है।
क्या बिना जन्मतिथि और समय के कुंडली बन सकती है?
इस पर संतोष 'संतोषी' ने कहा कि भविष्य जानने के लिए ज्योतिष जानने के और भी उपाय हैं। प्रश्न कुंडली बहुत शक्तिशाली विद्या है। इसी तरह मस्तक रेखा बड़ा सशक्त और अनोखा माध्यम है। हस्तरेखा हमारी दशाओं के आधार पर बदलती रहती है। आयु, भाग्य, हृदय आदि चीजों को हस्तरेखा से जान सकते हैं। हस्तरेखा में हाथ के आकार पर बड़ा फलित है। हस्तरेखा में सतत शोध की आवश्यकता होती है।