Neech bhang Rajyog: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में शुभ और अशुभ दोनों ही तरह के योगों का निर्माण होता है। शुभ योगों में कई तरह के राजयोग होते हैं। कुंडली में शुभ-अशुभ योग इस प्रकार के होते हैं- पंच महापुरुष राजयोग, गजकेसरी योग,बुधादित्य योग, मालव्य योग, हंस योग, शश योग, चांडाल योग, केमद्रुम योग, विषयोग, पिशाच योग, अंगारक योग आदि। इन्हीं योगों में एक राजयोग नीचभंग भी होता है। जिसकी चर्चा हम करेंगे। आइए जानते है क्या होता है यह नीचभंग राजयोग और जातक के जीवन पर इसका कैसा प्रभाव पड़ता है।
नीचभंग राजयोग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी जातक के जन्म के समय ही उसकी कुंडली का निर्धारण हो जाता है। कुंडली में ग्रहों और राशियों का एक क्रम अंकित होता है। इसमें ग्रह अलग-अलग स्थितियों में होते हैं। ज्योतिष शास्त्र की भाषा में ग्रह कुंडली में उच्च और नीच राशि में, मूल त्रिकोण राशि में, स्वराशि, मित्र, शत्रु और सम राशि में होते हैं। जब कोई ग्रह अपनी उच्च राशि में बैठता है तो ग्रहों के शुभ फलों में वृद्धि होती है वहीं जब ग्रह अपनी नीच राशि में विराजमान होता है बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन कई बार कोई ग्रह नीच राशि में इस तरह से बैठता है कि उसकी नीच की अवस्था खत्म हो जाती है और ग्रह प्रबल राजयोग बनकर शुभ फल प्रदान करने लगता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नीचभंग राजयोग को काफी शुभ माना गया है। इस राजयोग से से व्यक्ति रंक से राजा बन जाता है। आइए जानते हैं कुंडली में कब-कब नीचभंग राजयोग की स्थितियों का निर्माण होता है।
कुंडली में कैसे बनता है नीचभंग राजयोग
- अगर किसी कुंडली में कोई ग्रह अपनी नीच राशि में विराजमान है और उस राशि का स्वामी कुंडली के पहले भाव यानी लग्न भाव या फिर चंद्रमा से केन्द्र में स्थित हो तो कुंडली में नीचभंग राजयोग बनता है।
- अगर किसी कुंडली में कोई ग्रह नीच राशि में हो और उस राशि में उच्च का ग्रह चंद्रमा से केंद्र स्थान में हो तो नीचभंग राजयोग बनता है।
- जब किसी जन्मकुंडली में कोई उच्च राशि का ग्रह और नीच राशि का ग्रह एक साथ कुंडली में बैठे तो कुंडली में नीचभंग राजयोग बनता है। जैसे शुक्र और बुध दोनों ही 12 नबंर की राशि यानी मीन राशि में है। यहां बुध नीच और शुक्र उच्च के हैं तो नीचभंग राजयोग बनता है।
- अगर किसी जन्म कुंडली में कोई नीच ग्रह के स्वामी की द्दष्टि किसी नीच ग्रह पर पड़ती हो तो नीचभंग राजयोग बनता है। इसे उदाहरण के साथ इस तरह जानें कि जैसे बुध की नीच राशि मीन है और मीन राशि के स्वामी गुरु है और उनकी द्दष्टि बुध पर पड़े तो नीच भंग राजयोग बनता है।
- अगर किसी जातक को जन्म कुंडली में किसी ग्रह की नीच राशि का स्वामी और उसकी उच्च राशि का स्वामी परस्पर केंद्र स्थान मे हो नीचभंग राजयोग बनता है। अब इसे उदाहरण से इस प्रकार समझे- मंगल की नीच राशि कर्क है और इसके स्वामी चंद्रमा है और मंगल के उच्च राशि मकर है और इसके स्वामी शनि हैं। जब दोनों ही परस्पर केंद्र स्थान में हो तो नीचभंग राजयोग बनता है।
- जब कुंडली में नीच का ग्रह अगर वक्री हो तो नीचभंग राजयोग का निर्माण होता है। इससे अलावा अगर नीच ग्रह कुंडली के नवम भाव में उच्च का हो तो नीचभंग राजयोग बनता है।
नीचभंग राजयोग का असर
- अगर किसी कुंडली में सूर्य के कारण नीचभंग राजयोग बनता है तो जातक को राज्य की तरफ अच्छा लाभ मिलता है।
- अगर कुंडली में बुध ग्रह के कारण नीच भंग राजयोग बनता है तो जातक की बुद्धि गलत कार्यो में लगती है।
- चंद्रमा के कारण नीचभंग राजयोग बनने से जातक भावुक और जल्दी से किसी के ऊपर विश्वास करने लगता है।
- मंगल ग्रह के कारण बना नीचभंग राजयोग बनने से जातक को सरकारी नौकरी मिलती और जमीन-जायदाद से फायदा होता है। लेकिन जातक उग्र स्वभाव की भी हो सकता है।
- कुंडली में शनि की वजह से बनने वाला नीचभंग राजयोग जातक को कार्यो में कुशल और मेहनती बनता है।
- कुंडली में गुरु के कारण नीचभंग राजयोग बनने पर जातक की बुद्धि और ज्ञान तेज होता है।
- कुंडली में शुक्र के वजह से बना नीचभंग राजयोग व्यक्ति का मान-सम्मान और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी करता है।