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Mithun Sankranti 2023: 15 जून को मिथुन संक्रांति पर करें मात्र 5 उपाय, जानिए क्या होंगे इसके फायदे

Thu, 15 Jun 2023 11:38 AM IST
विनोद शुक्ला शैली प्रकाश

सार

सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। 15 जून 2023 गुरुवार की शाम को 06 बजकर 07 मिनट पर सूर्यदेव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। 
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Mithun sankranti 2023: मिथुन संक्रांति को रज पर्व भी कहा जाता है। ओडिशा में इस संक्रांति के दिन भगवान सूर्य से अच्छी फसल के लिए बारिश की मनोकामना करते हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सूर्यदेव के मिथुन राशि में प्रवेश को मिथुन संक्रांति कहते हैं। 15 जून 2023 गुरुवार की शाम को 06 बजकर 07 मिनट पर सूर्यदेव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन 5 महत्वपूर्ण कार्य करने से जीवन के सभी तरह के संकट मिट जाते हैं और पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

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मिथुन संक्रांति का महत्व 
मिथुन संक्रांति को रज पर्व भी कहा जाता है। ओडिशा में इस संक्रांति के दिन भगवान सूर्य से अच्छी फसल के लिए बारिश की मनोकामना करते हैं, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मिथुन संक्रांति को पृथ्वी माता के वार्षिक मासिक धर्म चरण के रूप में मनाते हैं, जिसे अंबुबाची मेला के नाम से भी जानते हैं। इस दिन सिलबट्टे की पूजा करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और धरती माता का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन से सभी नक्षत्रों में राशियों की दिशा भी बदल जाती है। इस बदलाव को बड़ा माना जाता है। इसके बाद ही वर्षा ऋतु की विधिवत रूप से शुरुआत हो जाती है।

मिथुन संक्रांति के उपाय

1. सूर्य पूजा : इस दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इसी के साथ ही सूर्यदेव की पूजा और आरती भी करना चाहिए। इस कार्य से जहां सूर्यदेव अच्छी सेहत का आशीर्वाद देते हैं वहीं सेहत अच्छी बनी रहती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और उच्च पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
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2. दान पुण्य : इस दिन गरीबों को गुड़, घी, गेहूं और तांबा खासतौर पर दान करने से करियर और नौकरी में लाभ प्राप्त होता है। इसी के साथ ही इस दिन मूंग, पालक और हरे रंग के वस्त्रों का दान करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।
3. नमक का त्याग करें : इस दिन सूर्यास्त तक नमक नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से सभी तरह के संकट दूर होकर सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्यापार में लाभ मिलता है। यदि सरकारी नौकरी है तो उसमें सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

4. पितृ तर्पण : इस दिन गंगा स्नान करने के बाद नदी के किनारे ही पितरों के लिए तर्पण और दान करने से पितृदेव प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और उनकी मुक्ति का मार्ग खुलता है। इससे पितृ दोष का निवारण भी होता है।

5. गंगा स्नान : ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस विशेष दिन गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं, उन्हें पूर्व में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। यदि आप गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर में ही शुद्ध जल में गंगा का जल मिलाकर स्नान करें और फिर सूर्य चालीसा का पाठ करें।
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