Mars Transit 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी मंगल राशि परिवर्तन करते हैं इसका व्यापक प्रभाव सभी राशियों के साथ-साथ देश-दुनिया पर देखने देखने को मिलता है। 7 जून का मंगल का राशि परिवर्तन सूर्य के स्वामित्व वाली राशि सिंह में हुआ है। सिंह राशि में गोचर करने से पहले मंगल अपनी नीच राशि कर्क में विराजान थे। मंगल के सिंह राशि में गोचर करने से मंगल और केतु के साथ युति बन हुई क्योंकि सिंह राशि में केतु पहले से ही विराजमान हैं। आइए जानते हैं मंगल के राशि परिवर्तन से कन्या राशि पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा।
कन्या राशि पर मंगल के राशि परिवर्तन का प्रभाव
कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल आपकी कुंडली के तीसरे और आठवें भाव के स्वामी होते हैं और 7 जून को सिंह राशि में प्रवेश करने के कारण यह आपके द्वादश भाव में गोचर कर रहे हैं। बारहवां भाव खर्चे का होता और यहां पर मंगल का गोचर अच्छा नहीं माना जाता। इस तरह से मंगल आपके लिए खर्चों में वृद्धि करवा सकता है। इससे अलावा स्थान परिवर्तन के योग भी हैं, आपको एक स्थान से दूसरे स्थान पर काम के लिए जाना जा सकता है। कामकाज के सिलसिले में दूर की यात्राएं हो सकती है। वहीं अगर द्वादश भाव में मंगल के गोचर करने से सप्तम भाव में इनकी द्दष्टि रहेगी जहां मंगल पहले से विराजमान हैं। ऐसे में जो लोग विवाहित है उनको अपने साथी से कुछ मनमुटाव हो सकता है। इसके अलावा जो लोग किसी के साथ साझेदारी में कोई काम कर रहें हैं उनको बहुत ही निगरानी रखनी होगी।
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ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व
वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को विशेष महत्व दिया गया है। सभी ग्रहों में जहां सूर्य को राजा, बुध को राजकुमार तो वहीं मंगल को सेनापति का दर्जा मिला हुआ है। ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, उत्साह, पराक्रम, युद्ध, रक्त, साहस और पराक्रम का कारक होता है। मंगल ग्रह एक अग्नि तत्व की राशि है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को क्रूर ग्रह भी माना जाता है। मंगल के कारण लोगों को विवाह में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मंगल ग्रह को मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामित्व मिला हुआ है। यह मकर राशि में यानी 10 नंबर की राशि में उच्च के होते हैं जबकि कर्क राशि यानी 4 नंबर की राशि में नीच के होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में मंगल शुभ स्थान में होते हैं और बली होते हैं ऐसा जातक स्वभाव से बहुत ही निडर और साहसी होता है। ऐसे व्यक्ति के अंदर साहस और पराक्रम बहुत ज्यादा रहता है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ अगर कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो जातक को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं। कुंडली में मंगल दोष होने पर व्यक्ति के विवाह में देरी और रुकावटों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की जन्मकुंडली में मंगल पहले चौथे, अष्टम और द्वादश भाव में बैठे होते हैं तो कुंडली में मंगल दोष बनता है। मंगल दोष को खत्म करने के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं।