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Mars Transit 2025: मंगल का सिंह राशि में गोचर, जानें मकर राशि पर कैसा होगा असर ?

Tue, 10 Jun 2025 06:07 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Mars Transit 2025: मंगल के गोचर का देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं मंगल के गोचर का मकर राशि के जातकों पर कैसा प्रभाव देखने को मिल रहा है। 
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मंगल का सिंह राशि में परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 Mars Transit 2025: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, तेज, भूमि, जमीन, सेना, युद्ध और रक्त का कारक ग्रह माना जाता है। मंगल को दो राशियों का स्वामित्व प्राप्त है पहला मेष और दूसरा वृश्चिक राशि। मंगल ग्रह 7 जून 2025 को अपनी नीच राशि की यात्रा को विराम देते हुए सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश कर चुके हैं। मंगल के गोचर का देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं मंगल के गोचर का मकर राशि के जातकों पर कैसा प्रभाव देखने को मिल रहा है। 
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मकर राशि पर मंगल के राशि परिवर्तन का प्रभाव
मकर राशि के स्वामी ग्रह शनिदेव होते हैं। मंगल का आपकी कुंडली के चौथे और एकादश भाव के स्वामी होते हैं। 7 जून 2025 को मंगल के गोचर करने से यह आपके अष्टम भाव में गोचर हैं। अष्टम भाव में मंगल का सिंह राशि में गोचर करने से और राहु-केतु के प्रभाव के चलते मकर राशि के जातकों पर मंगल का प्रभाव बढ़ जाएगा। आपके लिए इस दौरान सेहत में कुछ परेशानियां आ सकती हैं। पित्त संबंधी बीमारियों से एसिड अधिक बन सकता है। इस दौरान कुछ दुर्घटनाएं घट सकती है। इस दौरान मंगल के गोचर करने से नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है। 

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ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व
वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को विशेष महत्व दिया गया है। सभी ग्रहों में जहां सूर्य को राजा, बुध को राजकुमार तो वहीं मंगल को सेनापति का दर्जा मिला हुआ है। ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, उत्साह, पराक्रम, युद्ध, रक्त, साहस और पराक्रम का कारक होता है। मंगल ग्रह एक अग्नि तत्व की राशि है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को क्रूर ग्रह भी माना जाता है। मंगल के कारण लोगों को विवाह में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मंगल ग्रह को मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामित्व मिला हुआ है। यह मकर राशि में यानी 10 नंबर की राशि में उच्च के होते हैं जबकि कर्क राशि यानी 4 नंबर की राशि में नीच के होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में मंगल शुभ स्थान में होते हैं और बली होते हैं ऐसा जातक स्वभाव से बहुत ही निडर और साहसी होता है। ऐसे व्यक्ति के अंदर साहस और पराक्रम बहुत ज्यादा रहता है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ अगर कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो जातक को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं। कुंडली में मंगल दोष होने पर व्यक्ति के विवाह में देरी और रुकावटों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की जन्मकुंडली में मंगल पहले चौथे, अष्टम और द्वादश भाव में बैठे होते हैं तो कुंडली में मंगल दोष बनता है। मंगल दोष को खत्म करने के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं। 

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