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1 जुलाई से शनि मंगल का समसप्तक योग, गुरु पर वक्री शनि का प्रभाव, देश में धार्मिक उन्माद की आशंका

Wed, 21 Jun 2023 11:34 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

1 जुलाई से गोचर में एक विशेष प्रकार का संयोग बन रहा है जो दशकों बाद होता है। इस समय शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुम्भ में बलवान होकर विराजमान है और 17 जून से वो वक्री भी हो गए हैं।
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1 जुलाई से गोचर में एक विशेष प्रकार का संयोग बन रहा है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैदिक ज्योतिष में शनि, मंगल और राहु को पाप ग्रह कहा गया है और गुरु को न्यायपालिका का कारक माना गया है। शनि भले ही एक पाप ग्रह है लेकिन न्याय कारक ग्रह भी है। 1 जुलाई से गोचर में एक विशेष प्रकार का संयोग बन रहा है जो दशकों बाद होता है। इस समय शनि देव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुम्भ में बलवान होकर विराजमान है और 17 जून से वो वक्री भी हो गए हैं। दूसरी ओर शनि के शत्रु मंगल अग्नि तत्व राशि सिंह में 1 जुलाई को प्रवेश करेंगे। इस कारण शनि मंगल का समसप्तक योग बनेगा। सिंह और कुम्भ राशि भी शत्रु राशि है ऐसे में यह योग देश के लिए शुभ नहीं होगा।
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एक दूसरा विशेष योग गुरु राहु से बना हुआ है। इस समय राहु गुरु को पीड़ित कर रहा है और शनि की मेष राशि पर नीच की दृष्टि है। ज्योतिष में गुरु अदालत का कारक है ऐसे में इस समय शीर्ष अदालत किसी ऐसे मुद्दे पर अपना रुख साफ कर सकती है जिससे देश की जनता सीधे प्रभावित होगी। चूंकि, राहु धार्मिक उन्माद का कारक है ऐसे में जनता किसी गलतफहमी का शिकार होकर किसी बड़ी हिंसा को जन्म दे सकती है। 

1 जुलाई से 16 अगस्त तक का यह समय मंगल और राहु पर शनि की दृष्टि का होगा जिसके कारण ना सिर्फ धार्मिक उन्माद फैल सकता है बल्कि देश में अत्यधिक वर्षा भी देखने को मिल सकती है। मंगल शनि का यह समसप्तक योग पहाड़ों पर भूस्खलन और भूकंप के भी योग बनाएगा।
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